‘देश बदल चुका है’, तीसरे बच्चे पर चुनावी रोक को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

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नई दिल्ली : दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने वाले प्रावधानों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि समय के साथ देश की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अब इस तरह के कानूनों की वर्तमान संदर्भ में समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि जब ये प्रावधान बनाए गए थे, तब जनसंख्या नियंत्रण एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि अब देश की जनसंख्या वृद्धि दर और प्रजनन दर में बदलाव आया है। ऐसे में केवल तीसरा बच्चा होने के आधार पर किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित करना उचित है या नहीं, इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव लड़ने का अधिकार महत्वपूर्ण है और इस पर लगाए गए किसी भी प्रतिबंध की संवैधानिक कसौटी पर जांच आवश्यक है। अदालत ने संबंधित पक्षों से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा और मामले की आगे सुनवाई जारी रखने की बात कही।

यह मामला उन राज्य कानूनों से जुड़ा है, जिनमें दो से अधिक संतान वाले लोगों को पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने का प्रावधान है। अब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिदृश्य में ऐसे प्रावधान कितने प्रासंगिक और संवैधानिक हैं।