नई दिल्ली : छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों का लिखित दस्तावेज अब तक नहीं मिलने से स्थिति असमंजस में है।
सीजेपी के नेताओं के मुताबिक, 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पार्टी नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था। उस दौरान दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने पर सहमति बनने का दावा किया गया था।
बताया गया है कि बिहार के 20 जिलों में दर्ज 64 मुकदमे और असम में पांच मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। साथ ही आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई भी शुरू हुई है। हालांकि, सीजेपी का कहना है कि सरकार से जिस लिखित आश्वासन की उम्मीद थी, वह अभी तक नहीं मिला है।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विवाद और बढ़ गया है। कोर्ट ने पुलिस को दर्ज मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी है, हालांकि निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होनी है।
सीजेपी नेता सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार अदालत के आदेश का हवाला देकर लिखित आश्वासन देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है या पूर्व में दिए गए आश्वासन का उल्लंघन होता है, तो पार्टी के पास दोबारा आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
पूरे घटनाक्रम में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और सीजेपी के बीच 25 जुलाई को हुई सहमति को किस रूप में लागू किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार के रुख पर आंदोलन की आगे की दिशा निर्भर करेगी।








