नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं के संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर सुरक्षा बलों की कथित बर्बरता के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बिना गृह मंत्रालय की अनुमति के पैलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई की पांच तस्वीरें भी दिखाईं। उन्होंने कहा कि संसद से महज 500 मीटर की दूरी पर देश के युवाओं के साथ मारपीट की गई और उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर पुलिस ने जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से अत्याचार किया।
राहुल गांधी ने कहा कि वह एक ऐसे पीड़ित से मिले हैं, जिसके शरीर में पैलेट्स लगी थीं और आंख में पैलेट लगने के कारण उसकी दृष्टि प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठियों और अन्य उपकरणों से हमला किया गया तथा एक महिला प्रदर्शनकारी को पुलिसकर्मियों द्वारा थप्पड़ मारे गए।
‘मुद्दे उठाना मेरा अधिकार, लेकिन संसद में बोलने नहीं दिया गया’
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने छात्रों पर कथित कार्रवाई का मुद्दा संसद में उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे माफी मांगने के बाद ही बोलने की बात कही गई, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, “मुद्दे उठाना मेरा अधिकार है, लेकिन मुझे इससे वंचित रखा गया। मैंने स्पीकर से कई बार सदन को व्यवस्थित करने का आग्रह किया, लेकिन मुझे बोलने का अवसर नहीं दिया गया।”
राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती हैं। उन्होंने दावा किया कि 25 जुलाई को उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दो सवाल पूछे थे—क्या पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी और प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में नजर आए लोगों की पहचान क्या थी। राहुल के मुताबिक, उनके पत्र का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि युवाओं के खिलाफ कथित बर्बर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पद से जाना होगा।
सरकार का जवाब—‘गोली नहीं, आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ’
वहीं, राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं पर कोई गोली नहीं चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे।
लोकसभा में राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी तरह की गोलीबारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब गोली चलाई ही नहीं गई, तो उसके लिए किसी आदेश या अनुमति का सवाल ही नहीं उठता। मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में कार्रवाई का आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है, न कि किसी मंत्री के पास।
छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है।








