जयपुर : राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजनीति की बदलती संस्कृति पर चिंता जताते हुए जनप्रतिनिधियों को मर्यादा और आपसी सम्मान बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों में कड़वाहट नहीं आनी चाहिए।
वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि नेता एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि पुराने समय के नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद व्यक्तिगत संबंध मजबूत रहते थे और यही भारतीय राजनीति की परंपरा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और मोहनलाल सुखाड़िया का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों नेता सदन में कई मुद्दों पर अलग-अलग राय रखते थे, लेकिन उनके बीच आपसी सम्मान और संवाद की भावना हमेशा बनी रही।
राजे ने नए विधायकों को सलाह देते हुए कहा कि विधानसभा केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान का स्थान है। जनप्रतिनिधियों को अपनी भाषा, व्यवहार और कार्यशैली से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा जरूरी है, लेकिन इसे व्यक्तिगत विरोध में बदलना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सदन की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा और लोकतांत्रिक परंपराओं को याद किया।








