लाडनूं : तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में स्थित जैन विश्व भारती परिसर में योगक्षेम वर्ष का मंगल प्रवास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सन्निधि में 267वों तेरापंथ स्थापना दिवस भव्य रूप में समायोजित किया गया। सुधर्मा सभा में आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के दौरान मंच पर विराजमान युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज के निर्धारित विषय ‘तब तक चलेगा तेरापंथ’ व 267वां तेरापंथ स्थापना दिवस के संदर्भ में पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आज आषाढ़ी पूर्णिमा है। चतुर्मास लगने के बाद पहला मुख्य प्रवचन कार्यक्रम हो रहा है। 267वां तेरापंथ स्थापना दिवस भी है। आज का विषय है- तब तक चलेगा तेरापंथ। परम वंदनीय आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष की सम्पन्नता हुई। यह एक वर्ष हमारे धर्मसंघ को आचार्यश्री भिक्षु के विषय में कुछ बताने और जानने का रहा। इसके साथ जप और तप भी हुआ। अब उसकी सम्पन्नता भी हो गई। आचार्य भिक्षु और तेरापंथ दोनों मानों जुड़े हुए हैं। भिक्षु स्वामी हुए तो मानों तेरापंथ हुआ। तेरापंथ धर्मसंघ के प्रणेता, प्रवर्तक, प्रथम आचार्यश्री भिक्षु स्वामी हुए। वे हमारे धर्मसंघ के परमपिता हुए। एक पथ सामने आया तो पथ पर चलने वाले कितने पथिक भी सामने आए। साधु-साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं के रूप में भी पथिक बने। आगे जाकर समण श्रेणी का भी उद्भव हो गया।
तेरापंथ को जानने के लिए तेरापंथ का इतिहास भी जानना अपेक्षित है। इसके लिए अनेक ग्रन्थ भी उपलब्ध हैं। आचार्यश्री तुलसी की कृति ‘तेरापंथ प्रबोध’ के माध्यम से आचार्यश्री भिक्षु स्वामी व तेरापंथ की परंपराओं का संक्षेप जानकारी प्राप्त हो सकती है। तेेरापंथ का इतिहास आज भी मानों सुरक्षित है। तेरापंथ को जानने के लिए तेरापंथ दर्शन को जानने का प्रयास होना चाहिए। तेरापंथ के दर्शन को बताने वाला मर्मज्ञ हो तो कितनी अच्छी बात हो सकती है। आज इतना साहित्य भी प्राप्त है। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा चलाया जा रहा पाठ्यक्रम अच्छा माध्यम बन सकता है। तेरापंथ को जानने के लिए तेरापंथ की मर्यादा व व्यवस्था को भी जानने का प्रयास करना चाहिए। तेरापंथ की मर्यादाएं कितनी अच्छी हैं। इसमें एक है एक ही आचार्य की मर्यादा-व्यवस्था में चलना। जो रास्ता आत्मकल्याण का हो, उसे ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री भिक्षु के विचारों पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी ने भी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिवस तेरापंथ के लिए अति महत्त्वपूर्ण है। आज के दिन परम पूज्य अधिशास्ता आचार्यश्री भिक्षु ने नव्य-भव्य दीक्षा स्वीकार की। अकंप संकल्प के धनी हमें गुरु के रूप में प्राप्त हुए। आज के दिन हम सभी एक आचार्य के नेतृत्व में निरंतर विकास करते रहें। तदुपरान्त साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी व साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने जनता को उद्बोधित किया।
आज के अवसर पर मुनिवृंद ने गीत का संगान किया। साध्वी व समणीवृंद ने संयुक्त रूप से गीत का संगान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री सहित चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने स्थान पर खड़े होकर संघगान किया। इस प्रकार तेरापंथ स्थापना दिवस का मुख्य कार्यक्रम सुसम्पन्न हुआ।








