वॉशिंगटन : अमेरिका ने साइबर ठगी और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ नई वैश्विक वीजा प्रतिबंध नीति लागू की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह नीति उन लोगों को निशाना बनाएगी, जो साइबर अपराधों में सीधे तौर पर शामिल हैं या उन्हें बढ़ावा देने में मदद करते हैं। प्रतिबंध का दायरा ऐसे लोगों के करीबी परिवार के सदस्यों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
रुबियो ने कहा कि साइबर अपराध अमेरिकी नागरिकों के लिए अभूतपूर्व खतरा बन चुका है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के जरिए 2024 में अमेरिकी नागरिकों से कम से कम 10 अरब डॉलर की ठगी की गई। उन्होंने इन अपराधों के पीछे चीनी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों के सक्रिय होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नेटवर्क भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी को भी बढ़ावा देते हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने विदेशों से संचालित सेक्सटॉर्शन घोटालों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। इन मामलों में अमेरिकी बच्चों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन विदेशी आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए हर उपलब्ध माध्यम का इस्तेमाल कर रहा है। इनमें प्रतिबंध, मुकदमे, संपत्ति जब्ती, प्रत्यर्पण अनुरोध और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आपराधिक गिरोहों को खत्म करना और उन्हें सहयोग देने वालों की जवाबदेही तय करना है।
साइबर अपराध के खिलाफ यह कदम अमेरिका की व्यापक सुरक्षा नीति का हिस्सा है। इससे एक सप्ताह पहले, 16 जुलाई को अमेरिकी विदेश विभाग ने कथित तौर पर हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले विदेशी संगठनों से जुड़े लोगों के खिलाफ भी नई वीजा प्रतिबंध नीति की घोषणा की थी। इस नीति के तहत आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन या उकसाने, हिंसक आपराधिक गतिविधियों, वित्तीय मदद और भर्ती में शामिल विदेशी नागरिकों पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ऐसे विदेशी तत्वों को देश में प्रवेश से रोकना है, जो हिंसक, आपराधिक या आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने या उन्हें सहयोग देने में भूमिका निभाते हैं।








