दक्षिण चीन सागर से म्यांमार संकट तक, जयशंकर ने क्षेत्रीय मुद्दों पर रखा भारत का पक्ष

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मनीला : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को 21वें ईस्ट एशिया समिट में समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि समुद्री कर्मियों, नागरिक जहाजों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह के हमले को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सुरक्षित और निर्बाध बने रहने चाहिए तथा उनका संचालन अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होना चाहिए।

फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि समुद्री कर्मियों, गैर-सैन्य जहाजों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही के लिए प्रतिबद्ध है।

जयशंकर ने अपने संबोधन में दक्षिण चीन सागर, म्यांमार की स्थिति, सीमा पार साइबर ठगी के नेटवर्क और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका, क्षेत्रीय संतुलन तथा स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय कई संघर्षों के प्रभाव से जूझ रही है। ऐसे में ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को अनिश्चित और अस्थिर बताते हुए कहा कि आज परस्पर निर्भरता और साझा हितों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता भी मौजूद है।

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ऐसे प्रभावी और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है, जो 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप हो और सभी समुद्री उपयोगकर्ताओं के वैध अधिकारों से समझौता न करे।

म्यांमार संकट पर उन्होंने राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया और आसियान के नेतृत्व वाली पहलों के लिए भारत के निरंतर सहयोग की बात कही। साथ ही उन्होंने सीमा पार सक्रिय अवैध साइबर ठगी गिरोहों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया। इन नेटवर्कों से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।

फिलिस्तीन के मुद्दे पर जयशंकर ने दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत ने राहत और पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के प्रमुख उभरते दाताओं में शामिल है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से अब तक 14 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है।

ईस्ट एशिया समिट हिंद-प्रशांत क्षेत्र का एक प्रमुख वार्षिक मंच है, जिसमें पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया और ओशिनिया के देशों के नेता हिस्सा लेते हैं। इसका आयोजन आमतौर पर आसियान के वार्षिक शिखर सम्मेलनों के बाद किया जाता है।