पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, घायल छात्रों के इलाज के निर्देश

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नई दिल्ली :  प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों और अन्य लोगों के उपचार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों को आवश्यक और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामले में भी शीर्ष अदालत ने गंभीरता दिखाई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए घायल छात्रों और अन्य प्रभावित लोगों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। अदालत ने विशेष रूप से पैलेट गन से घायल लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि पैलेट गन के इस्तेमाल से प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें पहुंच सकती हैं। इस पर अदालत ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों में इसके इस्तेमाल का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। अदालत इस मामले में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों पर आगे सुनवाई करेगी।

याचिका में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों के लिए उचित मुआवजा, बेहतर चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई लोग घायल हुए, जिनमें एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने की बात भी कही गई है।

बताया गया है कि 20 जुलाई को पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च का आह्वान किया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगाए थे।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब घायल प्रदर्शनकारियों के उपचार के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग से जुड़े रिकॉर्ड भी मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण रहेंगे।