नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की परिचालन योजना और तैयारियों में अहम भूमिका निभाने वाले वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने शनिवार को उप नौसेना प्रमुख का पदभार संभाल लिया। वह इससे पहले करीब तीन वर्षों तक महानिदेशक नौसेना संचालन के पद पर रहे। उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर के अलावा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों में भी नौसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने 1 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभाला। वह 1990 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे और अपने करीब 36 वर्ष के सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण परिचालन एवं कमान संबंधी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वाइस एडमिरल प्रमोद भारतीय नौसेना के महानिदेशक नौसेना संचालन थे। इस दौरान उन्होंने नौसेना की परिचालन तैयारियों और समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। पश्चिम एशिया में संकट के दौरान भी उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित किया।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय नौसेना ने करीब 9,000 करोड़ रुपये के माल वाले 18 जहाजों को सुरक्षा प्रदान की थी। समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी प्रमोद की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
1990 में नौसेना में हुए थे शामिल
गोवा स्थित नौसेना अकादमी के 38वें एकीकृत कैडेट पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल प्रमोद को 1 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वह संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ होने के साथ नौसैनिक विमानन से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने वेलिंगटन स्थित रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
अपने लंबे करियर में उन्होंने आईएनएस राजपूत, आईएनएस अभय, आईएनएस शार्दुल और आईएनएस सतपुड़ा समेत कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों पर जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट और मुख्य प्रशिक्षक, नौसेना मुख्यालय में सहायक नौसेना प्रमुख तथा महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे हैं।
विशिष्ट सेवा के लिए सम्मान
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को उनकी विशिष्ट सेवा और परिचालन नेतृत्व के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक और युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके योगदान को देखते हुए उन्हें युद्ध सेवा पदक प्रदान किया गया था।
उप नौसेना प्रमुख के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय में शुरू हुई है, जब भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा, परिचालन क्षमता और आधुनिक सैन्य तकनीक के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है।








