स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को साल 2017 में टीम इंडिया का हेड कोच बनने का मौका मिला था। उस समय अनिल कुंबले के कोच पद से हटने के बाद बीसीसीआई नए कोच की तलाश में था। सहवाग ने अब करीब नौ साल बाद खुलासा किया है कि आखिर उन्होंने यह बड़ा ऑफर क्यों स्वीकार नहीं किया।
कोहली-कुंबले विवाद के बीच मिला था ऑफर
2017 में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान तत्कालीन कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच अनिल कुंबले के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं। टूर्नामेंट के बाद कुंबले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद तत्कालीन बीसीसीआई सचिव अमिताभ चौधरी ने सहवाग से संपर्क किया और उन्हें भारतीय टीम का मुख्य कोच बनने के लिए आवेदन करने को कहा।
सहवाग के मुताबिक, अगर विराट कोहली या अमिताभ चौधरी ने उनसे संपर्क नहीं किया होता तो वह इस पद के लिए आवेदन करने के बारे में सोचते भी नहीं।
सहवाग ने रखी थी खास शर्त
सहवाग ने बताया कि उन्होंने बीसीसीआई के सामने अपनी शर्त रखी थी। वह कोच बनने पर अपना पसंदीदा सपोर्ट स्टाफ चाहते थे। इसमें असिस्टेंट कोच, बैटिंग कोच, बॉलिंग कोच, फील्डिंग कोच, फिजियो और ट्रेनर शामिल थे।
सहवाग ने कहा कि उन्होंने उस समय न तो हां कहा था और न ही ना, लेकिन स्पष्ट कर दिया था कि अगर वह कोच बनते हैं तो उन्हें अपनी पसंद की पूरी टीम के साथ काम करने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, उनकी यह शर्त पूरी नहीं हुई और उन्होंने इस पद से पीछे हटना बेहतर समझा।
फिर रवि शास्त्री बने टीम इंडिया के कोच
सहवाग के पीछे हटने के बाद बीसीसीआई ने रवि शास्त्री को भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया था। उस समय कोच पद के चयन में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण वाली क्रिकेट सलाहकार समिति की भी अहम भूमिका थी।
इस तरह सहवाग के हाथ में टीम इंडिया की कोचिंग संभालने का बड़ा मौका आया, लेकिन अपनी शर्तों पर सहमति नहीं बनने के कारण वह इस जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं बन सके।








