मदरसे पर फिर गरमाई यूपी की सियासत, केशव मौर्य के बयान से मचा घमासान

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मदरसों को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मदरसा शिक्षा को लेकर बेहद तीखा बयान देते हुए कहा कि मदरसा चाहे पाकिस्तान का हो, बांग्लादेश का हो या भारत का, यह आतंकवादियों को पैदा करने की फैक्ट्री बन गया है। मौर्य ने दावा किया कि भारत या दुनिया में हुए बड़े आतंकी हमलों के पीछे मदरसा शिक्षा का प्रभाव रहा है।

मौर्य का यह बयान उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पत्रकारों से बातचीत में आया। मदरसों पर उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक शिक्षा, राष्ट्रवाद और आतंकवाद को लेकर बहस तेज होने के आसार हैं।

‘आतंकवादी मानसिकता पैदा होती है’

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि दुनिया में जहां भी बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं, उनके पीछे मदरसा शिक्षा को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले लोगों में देशभक्ति की भावना विकसित नहीं होती। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।

मौर्य ने अपने बयान को केवल भारत तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश के मदरसों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि समस्या सीमा के पार भी मौजूद है। उनका कहना था कि मदरसा शिक्षा को लेकर देश में गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

सपा पर भी साधा निशाना

मदरसे के मुद्दे के साथ ही केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव मुस्लिम वोटों के लिए जालीदार टोपी पहन सकते हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने भाजपा की राजनीति को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रवाद के लिए पूरी तरह समर्पित है।

उपमुख्यमंत्री ने सपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी के पास अब केवल नकारात्मक राजनीति और हंगामा करने का काम रह गया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है और प्रदेश की जनता इसका असर महसूस कर रही है।

‘2027 में सैफई चली जाएगी सपा’

केशव प्रसाद मौर्य ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी 2027 में सैफई चली जाएगी और उत्तर प्रदेश में भाजपा की तीसरी बार सरकार बनेगी।

उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आज समाजवादी पार्टी हिंदुओं की हितैषी बनने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके नेताओं को श्रीराम मंदिर निर्माण और चढ़ावे जैसे विषयों पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। मौर्य ने विधानसभा में सपा विधायकों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विकास, कानून-व्यवस्था, किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा कर रहा है।

2027 से पहले मुद्दों की नई पिच?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में मदरसा, तुष्टिकरण, राष्ट्रवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आते दिख रहे हैं।

मौर्य का बयान इसी बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा सकता है। भाजपा जहां राष्ट्रवाद और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाती रही है, वहीं विपक्ष अक्सर सरकार पर धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।

मदरसा शिक्षा को आतंकवाद से जोड़ने वाले मौर्य के बयान ने इसी राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। हालांकि, किसी भी शैक्षणिक या धार्मिक संस्था को आतंकवाद से जोड़ने वाले व्यापक दावों को तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर परखा जाना जरूरी है।

फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश में मदरसे का मुद्दा एक बार फिर सियासी मैदान में लौट आया है, और 2027 के चुनाव की आहट के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरम हो सकता है।