ई20 पर सियासी संग्राम: कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला, उठाए बड़े सवाल

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डेस्क :  पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण यानी ई20 को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ई20 पेट्रोल की नीति का सबसे अधिक लाभ आम उपभोक्ताओं को नहीं, बल्कि एथनॉल उत्पादकों को मिला है। पार्टी का कहना है कि इस नीति के कारण मध्यम वर्ग पर ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ पड़ा है और वाहन मालिकों के सामने ईंधन के विकल्प भी सीमित हो गए हैं।

कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार को पहले से पता था कि ई20 ईंधन के कारण वाहनों की माइलेज में कमी आ सकती है, तो उपभोक्ताओं को इसकी भरपाई पेट्रोल की कम कीमत के रूप में मिलनी चाहिए थी। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर इसका आर्थिक लाभ आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंचा।

2025 से नियमित पेट्रोल पंपों पर ई20 मिलने का दावा

जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि वर्ष 2025 से नियमित पेट्रोल पंपों पर वास्तविक रूप से ई20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के पुराने दावों का हवाला देते हुए कहा कि एथनॉल मिश्रण के बाद डीजल को करीब 50 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल के विकल्प को करीब 55 रुपये प्रति लीटर तक उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा कोई मूल्य लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि एक स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच ईंधन की कम माइलेज की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से करीब 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। यह आंकड़ा कांग्रेस द्वारा उद्धृत स्वतंत्र विश्लेषण पर आधारित है।

माइलेज कम होने पर कीमत घटाने की मांग

कांग्रेस ने कहा कि यदि ई20 पेट्रोल के कारण वाहनों की माइलेज में कमी आती है, तो सरकार को खुदरा पेट्रोल की कीमत कम करके आम लोगों को राहत देनी चाहिए थी। पार्टी ने नीति आयोग के एथनॉल रोडमैप का हवाला देते हुए कहा कि ई10 और ई20 ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं को वित्तीय और कर प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई थी।

कांग्रेस का आरोप है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय सरकार ने एथनॉल उत्पादकों को 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मंजूर की। पार्टी ने इसे नीति के लाभों के असमान वितरण का उदाहरण बताया।

मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त खर्च का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ई20 नीति के कारण उन लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है, जिन्होंने वर्षों की बचत के बाद अपने वाहन खरीदे हैं। पार्टी का कहना है कि यदि कम माइलेज के कारण वाहन अधिक ईंधन खपत कर रहे हैं, तो इसका सीधा असर वाहन मालिकों के मासिक बजट पर पड़ता है।

पार्टी ने यह भी दावा किया कि ई20 कार्यक्रम से यदि किसी वर्ग को सबसे अधिक लाभ मिला है तो वह एथनॉल उत्पादक हैं, जबकि आम उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिली।

सरकार का पक्ष भी जानना जरूरी

हालांकि, ई20 को लेकर सरकार का पक्ष कांग्रेस के आरोपों से अलग है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में कहा है कि ई20 ईंधन को वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू किया गया है और बड़े पैमाने पर वाहनों के क्षतिग्रस्त होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी कहा है कि ई20 के इस्तेमाल से वाहन की श्रेणी और उम्र के आधार पर माइलेज में कुछ कमी हो सकती है।

सरकार की ओर से एथनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों के लिए बाजार उपलब्ध कराने और उत्सर्जन कम करने की व्यापक नीति का हिस्सा बताया जाता रहा है।

विवाद का केंद्र माइलेज और उपभोक्ता खर्च

ई20 पर मौजूदा राजनीतिक विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि एथनॉल मिश्रण से मिलने वाले राष्ट्रीय और पर्यावरणीय लाभों की कीमत क्या आम उपभोक्ता को अतिरिक्त ईंधन खर्च के रूप में चुकानी पड़ रही है।

कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस संबंध में विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि ई20 नीति वैज्ञानिक परीक्षणों और ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की गई है।

इस बीच, ई20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। विपक्ष सरकार से नीति की समीक्षा, उपभोक्ताओं को राहत और ईंधन की गुणवत्ता तथा वाहनों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।

अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार ई20 को लेकर उठ रहे उपभोक्ता संबंधी सवालों का किस तरह जवाब देती है और क्या सरकार इस नीति के आर्थिक लाभों के साथ-साथ आम वाहन मालिक पर पड़ने वाले वास्तविक खर्च का भी विस्तृत आकलन सार्वजनिक करती है।