बच्चों के पैरों में क्रॉक्स: सुविधा या परेशानी?

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आजकल छोटे बच्चों के पैरों में रंग-बिरंगे क्रॉक्स या क्लॉग्स आसानी से नजर आ जाते हैं। हल्के, आरामदायक और पहनने में बेहद आसान होने के कारण माता-पिता भी इन्हें पसंद करते हैं। बच्चे भी इन्हें बिना किसी परेशानी के पहन लेते हैं। लेकिन क्या हर समय क्रॉक्स पहनना बच्चों के पैरों के लिए सही है?

दरअसल, बच्चों के पैर अभी विकास की अवस्था में होते हैं। ऐसे में जूते का आकार, उसकी फिटिंग, तलवे की मजबूती और पैर को मिलने वाला सपोर्ट उनके चलने-फिरने के तरीके पर असर डाल सकता है। इसलिए क्रॉक्स को पूरी तरह खराब मानने के बजाय यह समझना जरूरी है कि कब और कितनी देर इन्हें पहनाना ठीक है।

ढीली फिटिंग बन सकती है परेशानी

क्रॉक्स की सबसे बड़ी खासियत ही उनकी ढीली और आरामदायक फिटिंग है। लेकिन छोटे बच्चों के लिए यही बात कभी-कभी समस्या बन सकती है। अगर जूता पैर में अच्छी तरह फिट नहीं है तो चलते समय पैर जूते के भीतर आगे-पीछे खिसक सकता है। इससे बच्चा अपने कदमों को सामान्य तरीके से रखने के बजाय जूते को संभालकर चलने की कोशिश कर सकता है।

बहुत ढीले क्लॉग्स दौड़ते, सीढ़ियां चढ़ते या खेलते समय पैर से निकल भी सकते हैं, जिससे ठोकर लगने या गिरने का जोखिम बढ़ सकता है।

हर गतिविधि के लिए नहीं हैं क्रॉक्स

क्रॉक्स रोजमर्रा के हल्के कामों के लिए सुविधाजनक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें हर गतिविधि के लिए उपयुक्त नहीं माना जाना चाहिए। खासकर दौड़ने, तेज खेल खेलने, लंबी पैदल यात्रा या ऐसी गतिविधियों में जहां पैर को स्थिरता की जरूरत होती है, बच्चों के लिए अच्छी फिटिंग वाले जूते ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

खेल के दौरान बच्चे लगातार दिशा बदलते हैं और अचानक रुकते-दौड़ते हैं। ऐसे में पैर को मजबूती से पकड़ने वाला जूता अधिक उपयोगी रहता है।

पैर और टखने को कितना सपोर्ट मिल रहा है?

बच्चों के जूते का काम सिर्फ पैरों को ढकना नहीं है। एक अच्छे जूते को पैर की गतिविधि के साथ-साथ पर्याप्त स्थिरता और सुरक्षा भी देनी चाहिए। बहुत ढीला या पैर से ठीक से न जुड़ने वाला जूता कुछ बच्चों में चलने के तरीके को प्रभावित कर सकता है।

यदि बच्चा लगातार जूते को पैर में टिकाए रखने के लिए उंगलियों को मोड़कर चलने लगे, बार-बार ठोकर खाए या जूते पहनने के बाद असहज दिखाई दे, तो माता-पिता को उसके फुटवियर पर ध्यान देना चाहिए।

पसीना और नमी भी बन सकती है परेशानी

गर्म मौसम में लंबे समय तक किसी भी तरह के बंद या कम वेंटिलेशन वाले फुटवियर में पैर पसीने से नम हो सकते हैं। नमी बनी रहने पर पैरों की त्वचा में जलन या फंगल संक्रमण जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए बच्चों के पैरों को समय-समय पर सूखा रखना, जूतों को साफ रखना और जरूरत पड़ने पर उन्हें हवा लगने देना जरूरी है।

क्या क्रॉक्स बिल्कुल नहीं पहनाने चाहिए?

ऐसा कहना सही नहीं होगा। क्रॉक्स को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की जरूरत नहीं है। असल बात है सही समय, सही फिटिंग और सही गतिविधि।

बच्चे को कभी-कभार घर के आसपास, छोटी अवधि के लिए या ऐसी जगह जहां दौड़ने-भागने की जरूरत न हो, क्रॉक्स पहनाए जा सकते हैं। लेकिन स्कूल, खेलकूद, लंबी वॉक या ज्यादा सक्रिय गतिविधियों के लिए बच्चे की उम्र और गतिविधि के अनुसार अच्छी फिटिंग और पर्याप्त सपोर्ट वाले जूते चुनना बेहतर हो सकता है।

माता-पिता इन बातों का रखें ध्यान

बच्चे के लिए क्रॉक्स या कोई भी जूता खरीदते समय कुछ बातों को जरूर देखें—

  • जूता बहुत ढीला या बहुत टाइट न हो।
  • बच्चा उसे पहनकर आराम से चल पा रहा हो।
  • चलते समय पैर जूते के भीतर जरूरत से ज्यादा न खिसके।
  • जूते का तलवा फिसलन वाला न हो।
  • दौड़ने और खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए बेहतर फिटिंग वाले जूते चुनें।
  • पैरों में लाल निशान, छाले, दर्द या लगातार असहजता दिखाई दे तो जूते बदलें।
  • बच्चे के पैर बढ़ने के साथ जूते का आकार नियमित रूप से जांचते रहें।

जूता फैशन से ज्यादा जरूरत है

बच्चों के लिए जूते खरीदते समय रंग, डिजाइन और बच्चे की पसंद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन उनसे भी ज्यादा जरूरी है जूते की फिटिंग और उसका इस्तेमाल किस काम के लिए किया जा रहा है।

क्रॉक्स सुविधा के लिए अच्छे हो सकते हैं, लेकिन उन्हें हर परिस्थिति का जूता मान लेना सही नहीं है। बच्चों के बढ़ते पैरों के लिए ऐसा फुटवियर चुनना बेहतर है जो उनकी गतिविधि के अनुरूप हो और उन्हें आराम के साथ पर्याप्त स्थिरता भी दे।

याद रखें—बच्चों के पैरों को सिर्फ जूते की जरूरत नहीं होती, सही जूते की जरूरत होती है।