डेस्क : वंदे मातरम को लेकर जारी विवाद के बीच तमिलनाडु सरकार ने सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब राज्य के सभी आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाझथु’ से होगी। मुख्यमंत्री विजय थलपति की सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है।
सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर लागू होगा आदेश
मुख्य सचिव एम. साई कुमार की ओर से बुधवार को जारी आदेश के मुताबिक, ‘तमिल थाई वाझथु’ राज्य के सभी सार्वजनिक, सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में सबसे पहले गाया जाएगा। यह व्यवस्था शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर भी लागू होगी।
कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को गीत के दौरान सम्मान में खड़ा होना होगा। हालांकि, दिव्यांगजनों को इससे छूट दी गई है।
विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था प्रस्ताव
यह आदेश 10 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के बाद आया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने यह प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव में तमिल भाषा और तमिल सभ्यता के प्राचीन इतिहास को रेखांकित किया गया था।
क्या है तमिल थाई वाझथु?
‘तमिल थाई वाझथु’ को मनोनमनियम सुंदरनार द्वारा वर्ष 1891 में लिखे गए नाटक ‘मनोनमनियम’ से लिया गया है। इसे 23 नवंबर 1970 से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाता रहा है। वर्ष 2021 में इसे तमिलनाडु का आधिकारिक राजकीय गीत घोषित किया गया था।
वंदे मातरम विवाद से जुड़ा है फैसला
तमिलनाडु सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार की ओर से सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत और अन्य गीतों के क्रम को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में तमिलनाडु ने अपने राजकीय गीत को कार्यक्रमों की शुरुआत में प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
इस फैसले से तमिलनाडु और केंद्र के बीच भाषा, संस्कृति और आधिकारिक कार्यक्रमों में गीतों की प्राथमिकता को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।








