नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अब ‘‘माओवादी पार्टी’’ की दिशा में बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा था कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद ‘‘दिमागी नक्सलियों’’ को भी पहचानकर अलग-थलग करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी। कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें ‘‘दिमागी नक्सली’’ कहलाने पर गर्व है।
रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी किसी विशेष विपक्षी दल को निशाना बनाकर नहीं की गई थी। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने इसे अपने ऊपर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में ऐसे विचार रखने वाले लोगों का प्रभाव था और अब पूरी कांग्रेस पार्टी ‘‘माओवादी पार्टी’’ जैसी होती जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘‘वैचारिक नक्सलवाद’’ में देश को विभाजित करने की सोच, अलगाववादी प्रवृत्तियों का समर्थन और अनुच्छेद 370 की बहाली या पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने जैसी मांगों का समर्थन शामिल है।
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद को लेकर वही चिंता दोहराई है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने 2006 में मनमोहन सिंह के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया गया था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हथियारबंद नक्सली गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है, लेकिन नक्सली विचारधारा का प्रभाव शहरी क्षेत्रों में अभी भी मौजूद है और उससे भी निपटने की आवश्यकता है।
रिजिजू ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग देश के सुरक्षाबलों के जवानों की मौत पर संवेदना नहीं जताते और ऐसी घटनाओं का समर्थन करते हैं, उन्हें ‘‘दिमागी नक्सली’’ कहा जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस भी ऐसे विचारों से सहमत है।
इससे पहले सोमवार को भी रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि पार्टी को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिवार से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर मनमोहन सिंह का 13 अप्रैल 2006 का बयान साझा करते हुए नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया था।
वहीं, कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की ‘‘दिमागी नक्सल’’ टिप्पणी की आलोचना की है। कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाने वाला ‘‘अपमानजनक राजनीतिक विशेषण’’ बताया और इसे पहले इस्तेमाल किए गए ‘‘अर्बन नक्सल’’, ‘‘आंदोलनजीवी’’ और ‘‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’’ जैसे राजनीतिक आरोपों की नई कड़ी करार दिया है।
‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ी यह बयानबाजी आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन सकती है।








