डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था और मतदाता पहचान प्रणाली की तारीफ की है। ट्रंप ने अमेरिका में मतदाता पहचान को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित ‘सेव अमेरिका एक्ट’ की पैरवी करते हुए भारत की व्यवस्था को उदाहरण के तौर पर पेश किया। ट्रंप के इस बयान पर कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अमेरिका पर तंज कसा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि वे ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाएं और वहीं रखें। उन्होंने यह भी तंज कसा कि भारत अपनी ईवीएम भी अगली उपलब्ध उड़ान से अमेरिका भेज देगा।
ट्रंप ने भारतीय व्यवस्था का दिया उदाहरण
ट्रंप ने अमेरिका में चुनाव सुधारों की वकालत करते हुए भारत की मतदाता पहचान व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में मतदान के लिए वैध फोटो पहचान पत्र की व्यवस्था है। ट्रंप ने इसी आधार पर अमेरिका में भी मतदाता पहचान संबंधी नियमों को सख्त करने की जरूरत बताई।
ट्रंप ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, कुमार ने अमेरिका में बिना वैध फोटो पहचान के चुनाव होने को लेकर सवाल उठाया था। ट्रंप ने इस उदाहरण का इस्तेमाल ‘सेव अमेरिका एक्ट’ के समर्थन में किया।
कांग्रेस ने साधा निशाना
ट्रंप के बयान के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भारतीय चुनाव व्यवस्था और चुनाव आयोग को लेकर अपने पुराने सवालों को भी इस बहाने सामने रखा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर ट्रंप को भारतीय चुनाव व्यवस्था इतनी पसंद है तो ज्ञानेश कुमार और ईवीएम को भी अमेरिका ले जाना चाहिए।
कांग्रेस लंबे समय से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाती रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आरोपों को लेकर औपचारिक हलफनामा देने की मांग की है।
चुनाव व्यवस्था पर फिर सियासी बहस
ट्रंप के बयान के बाद भारत की चुनाव प्रक्रिया को लेकर घरेलू राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत की मतदाता पहचान व्यवस्था को अमेरिका के लिए उदाहरण बताया है, वहीं कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा है।
इस तरह ट्रंप की चुनाव सुधार संबंधी टिप्पणी ने भारत में चल रही चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।








