सोनिया पर कुमारस्वामी का ‘इटली’ वाला बयान, वंदे मातरम् पर बढ़ा सियासी घमासान

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नई दिल्ली : वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब सोनिया गांधी की नागरिकता और मूल पहचान तक पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनकी रगों में इटली का खून है और वह शादी के बाद भारत आई थीं। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर हुई। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने पूर्ण वंदे मातरम् के गायन पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कह रही थीं, क्योंकि वे काफी देर से खड़े थे।

कुमारस्वामी ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी की भारतीय पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह भारत की मूल निवासी नहीं हैं और शादी के बाद भारत आई थीं। उन्होंने कहा कि उनकी रगों में इटली का खून है और इसी कारण वह भारतीय भावनाओं का विरोध कर रही हैं। मंगलवार को कुमारस्वामी ने अपने बयान को दोहराते हुए सोनिया गांधी से पूछा कि उन्होंने देश के लिए क्या बलिदान दिया है।

कांग्रेस ने किया पलटवार

कुमारस्वामी के बयान पर कर्नाटक के मंत्री रिजवान अरशद ने उन्हें ‘हताश व्यक्ति’ बताया। उन्होंने सोनिया गांधी का बचाव करते हुए कहा कि वह कई भारतीयों से भी अधिक भारतीय हैं। अरशद ने कहा कि सोनिया गांधी के पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया और सोनिया गांधी एकजुट तथा न्यायपूर्ण भारत के लिए काम कर रही हैं।

वंदे मातरम् पर जारी है सियासी घमासान

वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप लगाया है और कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की है। दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम में वंदे मातरम् को रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई थी।

इस विवाद के बीच सोनिया गांधी को लेकर कुमारस्वामी की टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। अब यह मामला केवल वंदे मातरम् के गायन तक सीमित न रहकर राष्ट्रवाद, भारतीय पहचान और राजनीतिक विरासत की बहस में बदलता दिखाई दे रहा है।