डेस्क : उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 12वीं परीक्षा में प्रदेश में टॉप करने वाले प्रतापगढ़ के रजनीश यादव की शैक्षणिक उपलब्धियों पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों और नाम-जन्मतिथि में कथित हेरफेर के मामले में उनकी डिग्रियां निरस्त कर दी गई हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से टॉपर बनने पर मिला एक लाख रुपये का पुरस्कार और टैबलेट भी वापस लिया जाएगा।
रजनीश यादव ने वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 89.36 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्हें सरकार की ओर से सम्मानित किया गया था। अब शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर सामने आए फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद उनकी उपलब्धि पर कार्रवाई की गई है।
फर्जी अभिलेखों को लेकर हुई कार्रवाई
मामले में रजनीश पर शैक्षणिक अभिलेखों में कथित गड़बड़ी के साथ नाम और जन्मतिथि में हेरफेर के आरोप लगे थे। जांच के बाद उनकी संबंधित डिग्रियों को निरस्त करने का आदेश जारी किया गया है।
पुरस्कार भी होगा वापस
डिग्रियां निरस्त होने के बाद टॉपर के रूप में रजनीश को मिले सरकारी लाभ भी वापस लिए जाएंगे। इनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दिया गया एक लाख रुपये का पुरस्कार और टैबलेट शामिल है। इस संबंध में भी आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई है।
टॉपर बनने के बाद बदली तस्वीर
रजनीश यादव के लिए 89.36 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करना बड़ी उपलब्धि थी। सम्मान समारोह में उन्हें सरकारी स्तर पर सम्मान और पुरस्कार मिला था। लेकिन अब कथित शैक्षणिक फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद उनकी डिग्रियां और टॉपर के आधार पर मिले लाभ दोनों निरस्त किए जा रहे हैं।
मामले ने परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।








