मनन कुमार मिश्रा यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया था। खास बात है कि कुछ सप्ताह पहले ही सीजेपी ने शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया था।
ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन ने गुरुवार को प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसे सीजेपी नेताओं का समर्थन मिला है। संगठन ने मिश्रा का इस्तीफा मांगा है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने लिखा था, ‘मनन इट्स डन ब्रो। सभी कानूनी कॉकरोच इस प्रोटेस्ट में शामिल हों।’ दरअसल, हाल ही में NALSAR यूनिवर्सिटी में छात्रों के खिलाफ आदेश जारी कर बीसीआई चेयरमैन निशाने पर आ गए थे। हालांकि, कड़े विरोध के बाद उन्हें अपना आदेश वापस लेना पड़ा था।
क्या था विवाद
मिश्रा ने नालसार विश्वविद्यालय से इस वर्ष स्नातक करने वाले किसी भी विद्यार्थी को एडवोकेट के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं करने के आदेश दिए थे। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब विश्वविद्यालय के कुछ विद्यार्थियों ने कुलपति, कुलसचिव और शिक्षकों को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रस्ताव का विरोध किया।
मिश्रा ने पहले कहा था कि परिषद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI के शामिल होने के खिलाफ कथित अभियान से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है और उसने इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने वाली रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, आलोचना के बाद कुछ ही घंटों में यह फैसला वापस ले लिया गया था।
बाद में माफी मांगी
बयान में कहा गया, ‘यदि मौजूदा विवाद से जुड़ी किसी बात, मेरे किसी शब्द या पत्र से हमारे विधि विद्यार्थियों की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं इसके लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करता हूं और माफी मांगता हूं।’ इसमें कहा गया, ‘यह बात कहने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। खेद जताना प्रतिष्ठा या अहंकार का विषय नहीं है। यह केवल इस बात को स्वीकार करना है कि हमारे विद्यार्थियों की भावनाएं और चिंताएं मायने रखती हैं।’
अभिजीत दीपके पर क्या बोले
मिश्रा ने 14 अगस्त को कहा था कि वह भी छात्रों के हितों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा था, ‘जरूरत होगी तो सीजेपी के नेताओं से मैं बात करूंगा। बात करने से मैं नहीं करतराता हूं। जो बाते हैं, उनको मैं समझाऊंगा। यह कहीं कोई बात नहीं थी कि छात्र के हितों को कोई आघात पहुंचे…।’








