वंदे मातरम्’ पर संग्राम, कांग्रेस के फैसले पर नड्डा का प्रहार

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डेस्क : कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरों के गायन के फैसले पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 1937 में ‘वंदे मातरम्’ को दो हिस्सों में बांटने का फैसला देश के विभाजन की परिस्थितियों को मजबूत करने वाला साबित हुआ।

नड्डा ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि कांग्रेस ने 1937 के अपने प्रस्ताव का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरे गाने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय तुष्टीकरण की राजनीति के तहत लिए गए फैसले ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को बल दिया और अंततः देश के विभाजन की परिस्थितियां बनीं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150वें वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को सरकारी कार्यक्रमों में पूर्ण रूप से गाए जाने का निर्णय लिया है और इसे कानूनी स्वरूप भी दिया गया है।

नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अपनी स्थापना के समय से ही समझौते, तुष्टीकरण और विभाजनकारी ताकतों के आगे झुकने की राजनीति करती रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस ने राष्ट्रीय मूल्यों, राष्ट्रीय भावना और देश के गौरव से जुड़े मुद्दों पर लगातार समझौते किए हैं।

उन्होंने कहा कि आज जब देश आत्मसम्मान के साथ ‘पंच प्राण’ के संकल्प को लेकर विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब कांग्रेस कथित तौर पर तुष्टीकरण की राजनीति और गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है। नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी राष्ट्रीय पहचान और गौरव से जुड़े विषयों पर समझौता कर रही है।

कांग्रेस का 1937 के फैसले का हवाला

कांग्रेस कार्यसमिति ने बुधवार को फैसला किया था कि पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। पार्टी ने इसके लिए 1937 में लिए गए निर्णय का हवाला दिया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के 1937 के फैसले का पालन करेगी।

यह विवाद स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि 15 अगस्त को राष्ट्रगीत के गायन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी आपस में बातचीत कर रहे थे। भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की थी।

अमित शाह ने भी साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे तुष्टीकरण की राजनीति की पुनरावृत्ति बताते हुए कहा कि 1937 में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर लिया गया निर्णय देश के विभाजन की परिस्थितियों से जुड़ा था।

शाह ने कहा कि कांग्रेस का मौजूदा फैसला केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि वह उसी ऐतिहासिक निर्णय को दोहराने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण कांग्रेस ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना और स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष करते हुए बलिदान देने वाले शहीदों की भावनाओं का अपमान किया है।

भाजपा नेताओं के इन हमलों के बाद ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।