लाडनूं : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शुक्रवार को प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम के लिए सुधर्मा सभा में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को आज के निर्धारित विषय ‘प्रत्याख्यान से क्या मिलेगा?’ को आगम के माध्यम से व्याख्यायित करते हुए कहा कि प्रश्न किया गया कि प्रत्याख्यान से जीव क्या प्राप्त करता है? प्रत्याख्यान का अर्थ छोड़ देना, त्याग कर देना होता है। त्याग करना, छोड़ देना प्रत्याख्यान होता है।
बताया गया कि साधु की पर्युपासना से फल प्राप्ति की बात भी की जाए तो गृहस्थ साधु की पर्युपासना करे तो साधु से उसे कुछ सुनने को मिल सकता है। साधु-संतों से उन्हें कुछ ज्ञान की, तत्त्व की, जीवन दर्शन की बातें सुनने को मिल सकती हैं। बहुत अच्छी ज्ञान की बात भी मिल सकती है। आचार्यश्री तुलसी और आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के प्रवचन तो कितनों ने ही सुना होगा। संतों की वाणी का श्रवण करने से ज्ञान की अभिवृद्धि हो सकती है। सुनने से कई बातों की मानों पुष्टि भी हो सकती है। कोई सुनते-सुनते बहुत ज्ञानी भी बन सकता है। हेय-उपादेय का विवेक भी हो सकता है। हिंसा, चोरी, झूठ, धोखा आदि को छोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति हो जाने के बाद आदमी छोड़ने वाली चीजों का प्रत्याख्यान करता है। प्रत्याख्यान लेने वाला और प्रत्याख्यान कराने वाले में भी जागरूकता रहनी चाहिए।
त्याग पालन के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। प्रत्याख्यान से जीव आश्रव द्वारों का निरोध करता है। आश्रव द्वारों का निरोध हो जाता है तो फिर जीव सत्पथ पर आगे बढ़ने में सक्षम हो सकता है। आचार्यश्री तुलसी ने कितने-कितने को दीक्षा प्रदान की। कितनों पर उपकार किया। आचार्यश्री ने तेरापंथ धर्मसंघ के एक आचार्य निष्ठ परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्याख्यान छठा आवश्यक बताया गया है।
आचार्यश्री ने चतुर्मास के द्वारा होने वाले त्याग-प्रत्याख्यान का भी वर्णन कर चारित्रात्माओं को अभिप्रेरित करते हुए कहा कि साधुपन के पालन के प्रति सजगता रहनी चाहिए और साधुपन का पालन अखण्ड रूप में होता रहे।
आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा टीपीएफ गौरव वर्ष-2026 का अलंकरण समारोह भी समायोजित हुआ। इस संदर्भ टीपीएफ के पदाधिकारियों द्वारा टीपीएफ गौरव वर्ष- 2026 का अलंकरणस श्री सूर्यप्रकाश सामसुखा को प्रदान किया। उनका परिचय व उनके प्रशस्ति पत्र का वाचन टीपीएफ के ट्रस्टी श्री सुनील बोहरा ने किया। श्री सामसुखा ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। युगप्रधान अनुशास्ता ने इस संदर्भ में पावन पाथेय प्रदान करते हुए मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया।








