जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, पाकिस्तान की ‘हताशा’ पर टिप्पणी की जरूरत नहीं : विदेश मंत्रालय

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नई दिल्ली :  जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की आपत्ति पर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट रुख दोहराते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्से हैं। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने पर उसकी ‘हताशा’ पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “जम्मू, कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। वे थे, हैं और हमेशा रहेंगे।” पाकिस्तान की आपत्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान की हताशा पर टिप्पणी करने का कोई कारण नजर नहीं आता।

दरअसल, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से श्रीनगर में मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर गोर की टिप्पणी पर विरोध दर्ज कराया था। पाकिस्तान ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कश्मीर पर वाशिंगटन के कथित पुराने रुख के विपरीत बताया था।

गोर की यह यात्रा वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर की उनकी पहली स्वतंत्र यात्रा थी। मुलाकात के बाद उन्होंने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार का उल्लेख किया।

अमेरिकी राजदूत ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए जारी अपने यात्रा परामर्श की समीक्षा कर सकता है। फिलहाल अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर के लिए अपने नागरिकों को उच्चतम स्तर की ‘लेवल-4 : डू नॉट ट्रैवल’ यात्रा चेतावनी जारी कर रखी है।

गोर ने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपने यात्रा परामर्श की समीक्षा करता है और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में हुए सुधार को देखते हुए इस चेतावनी को कम करने की संभावना पर विचार किया जाएगा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को खूबसूरत क्षेत्र बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में अमेरिकी पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता और अवसरों का आनंद लेना चाहेंगे।

इस बीच, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने पर कहा कि यह पाकिस्तान और अमेरिका के बीच का मामला है।