डेस्क : 26/11 मुंबई आतंकी हमले के करीब 18 साल बाद भारत ने हमले के पाकिस्तानी साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है। मुंबई की विशेष अदालत में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद समेत छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इन आरोपियों में हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू कहाफा और मेजर अब्दुल रहमान पाशा शामिल हैं। सभी आरोपी पाकिस्तान में हैं और भारतीय जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर हैं।
इंटरपोल के जरिए नोटिस की तैयारी
मामले में विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने शुक्रवार को विशेष अदालत में अंतरिम रिपोर्ट पेश की। इसके बाद आरोपियों को भगोड़ा घोषित करने संबंधी आदेश इंटरपोल के माध्यम से तामील कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ सार्वजनिक उद्घोषणा की कार्रवाई भी कराई है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
BNSS की धारा 356 के तहत कार्रवाई
आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की कार्रवाई की जा रही है। इस प्रावधान के तहत घोषित अपराधी के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाया जा सकता है।
कसाब और हेडली से सामने आई थी साजिश
26/11 हमले की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए आतंकी अजमल कसाब और अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली से मिली जानकारी में हमले की साजिश और उसके पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।
अब करीब 18 साल बाद भारत ने हमले के उन आरोपियों के खिलाफ भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है, जो पाकिस्तान में रहकर अब तक भारतीय अदालत की कार्रवाई से बचे हुए थे।








