जयपुर : अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में शनिवार को “व्यक्तित्व में निखार कैसे लाएं, आओ—महावीर स्वामी के संदेश से समाधान पाएं” विषय पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। तेरापंथ संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के संदेशों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास और जीवन मूल्यों की प्रेरणा प्राप्त की।
मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ महाराज ने कहा कि केवल तन की सम्पन्नता पर्याप्त नहीं है, वास्तविक सम्पन्नता मन की उदारता और सकारात्मकता में निहित है। मन से सम्पन्न व्यक्ति का व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से निखरता है। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व का बहुआयामी विकास और चहुंमुखी निखार एकाग्रता, उदारता, व्यवहार कुशलता, सत्यवादिता, निर्भीकता और मन की दृढ़ता जैसे गुणों से संभव होता है।
मुनिश्री ने भगवान महावीर स्वामी के संदेशों का उल्लेख करते हुए व्यक्तित्व की तुलना वृक्ष से की। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तियों का व्यक्तित्व पत्तों वाले वृक्ष जैसा होता है, कुछ पुष्पों वाले वृक्ष जैसा और कुछ फल देने वाले वृक्ष जैसा। जिस प्रकार फलयुक्त वृक्ष अधिक उपयोगी और श्रेष्ठ माना जाता है, उसी प्रकार जिस व्यक्ति के व्यक्तित्व में गुणों की चमक, व्यवहार में महक और जीवन में सरसता होती है, उसका व्यक्तित्व विशिष्ट एवं उन्नत बन जाता है।
मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि कथनी और करनी में समानता व्यक्तित्व का श्रेष्ठ गुण है। जब व्यक्ति वही करता है जो वह कहता है, तो उसके प्रति विश्वास बढ़ता है और उसके विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि सरलता व्यक्तित्व में सुंदरता लाती है और अपने कथन के अनुरूप आचरण करने वाले व्यक्ति की समाज में अलग पहचान बनती है।
कार्यक्रम से पूर्व जप अनुष्ठान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। मुनि वृंद ने बीज मंत्रों का अनुष्ठान करवाया। इसके पश्चात तीर्थंकर अजीत प्रभु की स्तुति के सामूहिक संगान से प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर सिद्धि तप की साधना कर रहीं तपस्विनी बहिन श्रीमती सरोज देवी कोठारी की तप अनुमोदना भी की गई। तेरापंथ महिला मंडल (शहर) की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जी जैन तथा तेरापंथ युवक परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्री गौतम जी बरडिया ने तपस्विनी के प्रति अनुमोदना व्यक्त करते हुए उनके तप और साधना की सराहना की।
कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और आत्मचिंतन से ओतप्रोत रहा। भगवान महावीर के संदेशों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को यह प्रेरणा मिली कि व्यक्तित्व की वास्तविक सुंदरता बाहरी सम्पन्नता में नहीं, बल्कि मन की उदारता, व्यवहार की सरलता और आचरण की शुद्धता में निहित है।








