मोदी की वैश्विक स्वीकार्यता पर पीयूष गोयल का बड़ा दावा, बोले- ७-८ इस्लामिक देशों ने दिया सर्वोच्च सम्मान

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नई दिल्ली :  केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर फैलाए जा रहे कथित राजनीतिक नैरेटिव पर विपक्ष को घेरा है। जापान के टोक्यो में एक कार्यक्रम के दौरान गोयल ने कहा कि लोगों के बीच गलतफहमियां पैदा करने और समाज को बांटने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाने का प्रयास होता है कि प्रधानमंत्री मोदी समाज के किसी खास वर्ग को नुकसान पहुंचा सकते हैं या किसी समुदाय के साथ भेदभाव कर सकते हैं।

गोयल ने इस नैरेटिव के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई इस्लामिक देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा है। उनके मुताबिक, यह इस बात का संकेत है कि मुस्लिम देशों में भी प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकार्यता और भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को देखा जा रहा है।

‘कोई भारत को बांट नहीं सकता’

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए देश के राजदूत और विदेशों में भारतीय प्रतिनिधि लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को बांटने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

गोयल ने ‘विकसित भारत २०४७’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकास के लिए समाज का एकजुट रहना जरूरी है। उनका कहना था कि बंटा हुआ देश विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता।

जापान से निवेश और विनिर्माण पर भी चर्चा

टोक्यो में गोयल ने भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने की इच्छुक जापानी और अन्य प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ निवेश से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि सरकार कंपनियों की उन चिंताओं को दूर करने पर काम कर रही है, जो भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमाणन से जुड़ी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जरूरत के अनुसार कंपनियों, उद्योगों, उत्पादों या पूरी परियोजनाओं को प्रमाणन संबंधी छूट देने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत में नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली बड़ी तकनीकी कंपनियों के लिए मशीनरी, उपकरण और अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता आसान बनाना है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर सरकार का जोर

गोयल ने भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार भारत को दुनिया के बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष २०३२ तक भारत में सेमीकंडक्टर की मांग करीब १५० अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ‘सेमिकॉन २.०’ को मंजूरी दी है।

पीयूष गोयल के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और सामाजिक प्रभाव को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक बहस लगातार जारी है। गोयल ने अपने बयान के जरिए सरकार की ‘सबका साथ’ वाली छवि को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बनाए जा रहे कथित विभाजनकारी नैरेटिव को खारिज करने की कोशिश की।