डेस्क : कुवैत ने पाकिस्तान के साथ नए रक्षा समझौते के ठीक एक दिन बाद भारत के साथ भी अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में भारत और कुवैत के बीच पहली संयुक्त रक्षा समिति (Joint Defence Committee) की बैठक हुई, जिसमें सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त युद्धाभ्यास, रक्षा उद्योग और अनुसंधान एवं विकास समेत कई अहम मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक दिन पहले ही कुवैत और पाकिस्तान ने ‘प्रोटोकॉल एग्रीमेंट-2026’ पर हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान के साथ समझौते के बाद कुवैत का भारत के साथ उच्चस्तरीय रक्षा संवाद इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कुवैत दोनों देशों के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ा रहा है।
भारत-कुवैत के बीच किन मुद्दों पर बनी सहमति?
नई दिल्ली में हुई पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक में दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को मजबूत करने पर जोर दिया। इसके अलावा नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा, स्टाफ स्तर की बातचीत, रक्षा उद्योग तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान हुए रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग को अब अधिक व्यावहारिक और संस्थागत स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है।
कुवैत के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की बातचीत
बैठक में कुवैती प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसक्रान ने किया। भारतीय पक्ष की अगुवाई रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल रहे।
कुवैती प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारियों के साथ संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा की।
एक दिन पहले पाकिस्तान के साथ किया था रक्षा समझौता
भारत के साथ बैठक से ठीक एक दिन पहले कुवैत ने पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए ‘प्रोटोकॉल एग्रीमेंट-2026’ पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, सीमा प्रबंधन, सैन्य विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और अन्य रक्षा क्षेत्रों में सहयोग का प्रावधान है।
इससे पहले दोनों देशों के बीच 2023 में भी रक्षा सहयोग का एक समझौता हुआ था। नया समझौता उसी ढांचे को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
भारत के साथ रिश्ते भी लगातार मजबूत कर रहा कुवैत
भारत और कुवैत के बीच राजनयिक संबंध 1962 से हैं। दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक बढ़ाया गया था। अब रक्षा क्षेत्र में संयुक्त प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग इस साझेदारी को नया आयाम दे सकता है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते के अगले ही दिन भारत के साथ पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक कुवैत की संतुलित रणनीति को दर्शाती है। खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच कुवैत भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।








