भारतीय रेलवे के नक्शे पर आएगा भूटान, चीन की बढ़ेगी टेंशन

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डेस्क : भारत और भूटान के बीच रेल कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित रेल परियोजनाओं के जरिए भूटान पहली बार भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ सकता है। इस पहल को भारत-भूटान संबंधों में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही, इससे चीन की रणनीतिक चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।

भारत और भूटान के बीच रेल संपर्क बढ़ाने को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। प्रस्तावित कनेक्टिविटी का उद्देश्य भूटान को भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों की आवाजाही को आसान बनाना है।

असम और पश्चिम बंगाल से जुड़ने की योजना

प्रस्तावित रेल संपर्क के तहत भूटान को भारत के पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती क्षेत्रों से जोड़ने की योजना है। इससे भूटान के लिए भारत के बड़े बाजारों और परिवहन नेटवर्क तक पहुंच आसान होगी। रेल कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद माल और यात्रियों की आवाजाही में तेजी आने की उम्मीद है।

भारत और भूटान के बीच मौजूदा मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भूटान अपनी अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। ऐसे में रेल संपर्क दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

भूटान की चीन के साथ सीमा को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। भारत और चीन के बीच भी भूटान से जुड़े सीमाई क्षेत्रों को लेकर रणनीतिक संवेदनशीलता रही है। ऐसे में भूटान को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना को क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

रेल कनेक्टिविटी से भारत के पूर्वोत्तर और भूटान के बीच संपर्क मजबूत होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक पहुंच को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक प्रगति और इसके पूरा होने की समयसीमा संबंधित समझौतों और निर्माण कार्य पर निर्भर करेगी।

भारत और भूटान के बीच प्रस्तावित रेल संपर्क आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन का नया रास्ता खोल सकता है।