नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक प्रदर्शन की समीक्षा की। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार तथा सभी 16 डीपीएसयू के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मौजूद रहे। अधिकारियों ने रक्षा मंत्री को संबंधित उपक्रमों के प्रदर्शन, प्रमुख उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
समीक्षा बैठक में स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ाने, विनिर्माण क्षमता के विस्तार, अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास, रक्षा निर्यात में वृद्धि, आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और प्रमुख परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
राजनाथ सिंह ने डीपीएसयू के योगदान की सराहना करते हुए अगले पांच वर्षों के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए डीपीएसयू को अपनी कार्यप्रणाली और क्षमताओं में निरंतर बदलाव लाना होगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हासिल किया, जिसमें डीपीएसयू का योगदान करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर रक्षा औद्योगिक आधार की दिशा में देश की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
आयात निर्भरता घटाने और निर्यात बढ़ाने पर जोर
सिंह ने डीपीएसयू से समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने, आयात पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान एवं विकास को तकनीकी नेतृत्व में बदलने तथा रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपील की। उन्होंने पूंजीगत व्यय बढ़ाने के साथ उत्पादकता में सुधार, स्टार्टअप और एमएसएमई को अधिक सहयोग देने तथा उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हाल के वैश्विक संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश के लिए भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला, युद्धकाल में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की क्षमता, महत्वपूर्ण कलपुर्जों की उपलब्धता और तेज मरम्मत व्यवस्था कितनी जरूरी है। ऐसे में डीपीएसयू का परिवर्तन केवल आर्थिक या औद्योगिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता है।
आरएंडडी में निवेश के साथ तकनीकी उपलब्धि जरूरी
रक्षा मंत्री ने डीपीएसयू द्वारा अनुसंधान एवं विकास में बढ़ते निवेश का स्वागत किया, लेकिन कहा कि आरएंडडी की सफलता का आकलन केवल खर्च की गई राशि से नहीं होना चाहिए। इसके बजाय नई तकनीकों, बौद्धिक संपदा, प्रोटोटाइप और उपयोगी परिचालन उत्पादों के विकास को सफलता का आधार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने भारत के लिए ऐसी विशिष्ट तकनीकी क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया, जहां देश केवल आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की स्थिति में पहुंच सके। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य के तहत सभी डीपीएसयू को वैश्विक स्तर की कंपनियों में बदलने का आह्वान किया।
सात डीपीएसयू ने सौंपे 3,951 करोड़ रुपये के लाभांश चेक
कार्यक्रम के दौरान सात डीपीएसयू—हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, बीईएमएल और मिधानी—के सीएमडी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी के बदले कुल 3,951 करोड़ रुपये के लाभांश चेक रक्षा मंत्री को सौंपे।
चार पुस्तकों का विमोचन
इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने चार पुस्तकों का भी विमोचन किया। इनमें ‘आत्मनिर्भर डीपीएसयू—जर्नी ऑफ डीपीएसयूज टुवर्ड्स सेल्फ-रिलायंस’, ‘दिशा’, एचएएल का ‘मॉडर्नाइजेशन रोडमैप’ और ‘इंडिजिनाइजेशन रोडमैप’ शामिल हैं।
इन प्रकाशनों में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, नए उत्पादों के विकास, नई विनिर्माण प्रक्रियाओं, छात्रों और उद्योग के बीच संवाद, तकनीकी नवाचार तथा भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया है।









