डेस्क : संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के मानचित्र को अधिक सटीक तरीके से प्रदर्शित करने के उद्देश्य से लाए गए बराबर क्षेत्रफल वाले मानचित्रण प्रस्ताव का भारत ने समर्थन किया है। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया कि इस समर्थन का मतलब किसी विशेष विश्व मानचित्र या भारत की राष्ट्रीय सीमाओं के किसी नए चित्रण को स्वीकार करना नहीं है।
यह प्रस्ताव चार सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित हुआ। भारत समेत 164 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया। प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जिनमें दुनिया के अलग-अलग भूभागों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल अनुपात बेहतर तरीके से प्रदर्शित हो।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत का स्पष्ट रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की पहल के तहत तैयार किए जाने वाले किसी भी विश्व मानचित्र में भारत के संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं, को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं होगा।
जायसवाल ने कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट, लगातार और अडिग है। इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
किसी खास नक्शे का समर्थन नहीं
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का समर्थन किसी एक खास मानचित्र या मानचित्रण पद्धति के लिए नहीं है। प्रस्ताव का उद्देश्य बराबर क्षेत्रफल वाली मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जिससे महाद्वीपों के आकार का वास्तविक अनुपात अधिक सही ढंग से सामने आए।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने मतदान की व्याख्या में भी कहा कि प्रस्ताव को किसी विशेष मानचित्र, प्रक्षेपण या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण की मंजूरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम से जुड़े राजनीतिक मानचित्रण का विषय नहीं है।
पुराने नक्शे में क्यों दिखता है आकार का अंतर?
मौजूदा दुनिया के नक्शों में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली मर्केटर मानचित्रण पद्धति में ध्रुवों के करीब स्थित भूभाग वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं। इसके कारण अफ्रीका जैसे विशाल महाद्वीप का आकार भी कई बार वास्तविक अनुपात से छोटा नजर आता है।
बराबर क्षेत्रफल वाली मानचित्रण पद्धतियों का उद्देश्य इसी तरह के आकार संबंधी भ्रम को कम करना और दुनिया के भूभागों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में दिखाना है।
भारत ने इस तकनीकी पहल का समर्थन करते हुए साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि मानचित्रण की पद्धति पर चर्चा हो सकती है, लेकिन देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा।








