यूपीआई भुगतान पर शुल्क को लेकर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

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डेस्क : यूपीआई भुगतान पर शुल्क को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद गहरा गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाने की व्यवस्था स्पष्ट किए जाने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के बड़े व्यापारी भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है और यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया है।

राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने झुक रहे हैं। उनका दावा है कि यदि बड़े व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लागू किया जाता है तो इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। कांग्रेस का तर्क है कि व्यापारी अतिरिक्त लागत को सामान और सेवाओं की कीमत में शामिल कर सकते हैं।

दो हजार रुपये तक भुगतान पर शुल्क नहीं

वित्त मंत्रालय की 14 सितंबर की अधिसूचना के अनुसार, दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर बैंक या भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराने वाली संस्थाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकतीं। सरकार ने इस सीमा तक होने वाले डिजिटल भुगतान को शुल्क से मुक्त रखने की स्थिति स्पष्ट की है।

हालांकि, दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए अधिसूचना में शुल्क-मुक्ति की यही सीमा लागू नहीं की गई है। इसी बिंदु को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर फिलहाल कोई निश्चित शुल्क दर लागू नहीं की गई है। यानी बड़े भुगतान पर शुल्क लगाने की संभावना का रास्ता खुला है, लेकिन अभी शुल्क लगाया नहीं गया है।

कांग्रेस ने अमेरिका से जोड़ा मामला

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम अमेरिकी भुगतान कंपनियों के हित में है। कांग्रेस का कहना है कि यदि बड़े यूपीआई व्यापारी भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है तो इससे डिजिटल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या सरकार अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत के दबाव में यह बदलाव कर रही है।

इससे पहले भी यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच बयानबाजी होती रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से भारत की डिजिटल भुगतान नीतियों को लेकर आपत्तियां जताई जा चुकी हैं।

भाजपा ने आरोपों को बताया भ्रामक

वहीं, भाजपा ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दो हजार रुपये तक के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही, दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर भी फिलहाल कोई शुल्क दर तय नहीं की गई है। इसलिए यह कहना कि बड़े यूपीआई भुगतान पर तत्काल शुल्क लागू कर दिया गया है, सही नहीं होगा।

बड़े भुगतान पर नजर

यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का अहम हिस्सा बन चुका है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक यूपीआई से 55.49 करोड़ उपयोगकर्ता जुड़े थे और वित्त वर्ष 2025-26 में इसके माध्यम से 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 314.23 लाख करोड़ रुपये रहा। ऐसे में बड़े लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर उठे सवालों का असर व्यापारियों और डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ सकता है।

फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि दो हजार रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई भुगतान पर भविष्य में कोई शुल्क लागू किया जाएगा या नहीं। सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम शुल्क दर घोषित नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस के साथ-साथ सरकार के अगले फैसले पर भी नजर रहेगी।