डेस्क : मतदाता सूची से जुड़े बूथ स्तर अधिकारियों के ऐप में वीआईपी मतदाताओं को चिह्नित करने के विकल्प को लेकर उठे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, प्रमुख मतदाताओं को चिह्नित करने की प्रक्रिया नई नहीं है और विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से पहले भी इसका इस्तेमाल होता रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि आधिकारिक दस्तावेजों में वीआईपी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसमें सांसद, विधायक और विधान परिषद के सदस्य, संवैधानिक या घोषित पदों पर आसीन व्यक्ति तथा कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, न्यायपालिका और लोक सेवाओं से जुड़े प्रमुख लोगों को चिह्नित करने का प्रावधान है।
यह विवाद बूथ स्तर अधिकारियों के ऐप में हालिया बदलाव के बाद सामने आया। ऐप में ‘वीआईपी मतदाता से संबंधित बदलाव दर्ज करें’ जैसा विकल्प दिखाई देने के बाद इस पर सवाल उठाए गए। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि प्रमुख मतदाताओं को चिह्नित करने की व्यवस्था पहले की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रियाओं में भी मौजूद रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रमुख मतदाताओं से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और सूचनाएं समय पर उपलब्ध कराना है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐप में दिखाई देने वाला ‘वीआईपी’ शब्द उसकी आधिकारिक शब्दावली का हिस्सा नहीं है।
गौरतलब है कि बूथ स्तर अधिकारियों के ऐप में इस विकल्प के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या कुछ मतदाताओं के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। आयोग ने इसे पहले से चली आ रही प्रक्रिया बताते हुए विवाद पर स्पष्टीकरण दिया है।








