भारत-ऑस्ट्रेलिया ऊर्जा सहयोग पर जोर, अल्बानीज़ ने पीएम मोदी के प्रयासों को सराहा

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डेस्क : ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भारत में ऊर्जा की पहुंच बढ़ने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। अल्बानीज ने कहा कि भारत में मोदी के नेतृत्व में इतिहास के किसी भी अन्य दशक, क्षेत्र या देश की तुलना में अधिक लोगों को ऊर्जा तक पहुंच मिली है। उन्होंने यह टिप्पणी एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में की।

अल्बानीज ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के संबंध मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है।

ऊर्जा सुरक्षा पर दोनों देशों का जोर

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने जुलाई 2026 में ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर संयुक्त वक्तव्य जारी किया था। इसमें दोनों देशों ने ऊर्जा आपूर्ति को भरोसेमंद, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युतीकरण को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यालय के अनुसार, दोनों देशों ने ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने, ऊर्जा व्यापार बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया से भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया गया है।

भारत ने बढ़ाए ऊर्जा आयात के स्रोत

भारत सरकार के अनुसार, देश ने ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विविध बनाने के लिए कच्चे तेल, रसोई गैस और पाइप के जरिए आने वाली प्राकृतिक गैस के आयात के स्रोत बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष लोकसभा में बताया था कि पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा का आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा के अलावा रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। जुलाई में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते और द्विपक्षीय निवेश संधि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता भी दोहराई थी।

अल्बानीज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया है।