जिनेवा : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में बलूचिस्तान में महिलाओं, लड़कियों और मानवाधिकार रक्षकों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं उठाई गईं। विभिन्न वक्ताओं ने कथित जबरन गुमशुदगी, मनमानी हिरासत, यातना, न्यायेतर हत्याओं और शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध जैसे आरोपों की स्वतंत्र जांच और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की मांग की। परिषद का 63वां सत्र 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक जिनेवा में आयोजित हो रहा है।
अल बराएम एसोसिएशन फॉर चैरिटेबल वर्क की महरा अब्दुल जलील ने एजेंडा आइटम 8 के तहत संबोधित करते हुए कहा कि बलूच महिलाओं और लड़कियों पर कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि बलूच महिलाएं न्याय और जवाबदेही की मांग करने वाले शांतिपूर्ण आंदोलनों में सक्रिय रही हैं, जबकि कथित तौर पर लापता या मारे गए लोगों के परिवारों को सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जलील ने परिषद से बलूच महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों तथा सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कथित घटनाओं की स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शी जांच और मानवाधिकार उल्लंघनों का शांतिपूर्ण तरीके से दस्तावेजीकरण करने वालों की सुरक्षा की मांग की। संयुक्त राष्ट्र की बैठक के आधिकारिक प्रतिलेख में भी उनके हस्तक्षेप में बलूच महिलाओं और लड़कियों से जुड़े इन आरोपों का उल्लेख दर्ज है।
एक अन्य हस्तक्षेप में जेस्सोर यूथ ऑर्गनाइजेशन की डायना स्टेफनी देहिमत ने बलूच मानवाधिकार रक्षकों और कार्यकर्ताओं की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कथित जबरन गुमशुदगी, मनमानी हिरासत, न्यायेतर हत्याओं और शांतिपूर्ण गतिविधियों पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन घटनाओं से महिलाओं और नाबालिगों के प्रभावित होने की भी बात सामने आई है।
देहिमत ने महजबीं बलूच का मामला भी उठाया। उनके अनुसार, पोलियो से उबर चुकीं महजबीं बलूच के कथित रूप से लापता होने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. सबीहा बलूच के खिलाफ कथित कार्रवाई का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके नाम को पाकिस्तान के ‘फोर्थ शेड्यूल’ में रखे जाने तथा पहचान संबंधी दस्तावेजों और बैंक खाते पर कथित प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
देहिमत ने संयुक्त राष्ट्र से इन आरोपों की जांच करने, लापता लोगों के बारे में जानकारी हासिल करने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने पाकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने, मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और प्रभावित परिवारों को प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध कराने की अपील की।
परिषद में हुए इन हस्तक्षेपों के माध्यम से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों से जुड़े लंबे समय से लगाए जा रहे आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर उठाया गया, खासकर महिलाओं, नाबालिगों, कार्यकर्ताओं और लापता लोगों के परिवारों पर कथित प्रभाव को लेकर।








