पेरिस : एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने के विवाद में हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) को जांच में राहत मिली है। पेरिस के जनरल इंस्पेक्टरेट की जांच में सामने आया है कि BAPS के प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई स्पष्ट मांग नहीं की गई थी। जांच रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम को संचार और प्रबंधन में हुई चूक का परिणाम बताया गया है।
मामला 5 सितंबर का है, जब BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का निजी दौरा किया था। दौरे के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को अस्थायी रूप से अपने कार्यस्थल से हटने के लिए कहा गया। इसके बाद कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। विवाद के चलते एफिल टावर को एक दिन के लिए बंद भी करना पड़ा था।
BAPS ने शुरुआत से ही महिला कर्मचारियों को हटाने का निर्देश देने के आरोप से इनकार किया था। संगठन का कहना था कि उसके प्रतिनिधिमंडल ने इस तरह की कोई मांग नहीं की थी। अब जांच रिपोर्ट में भी इस दावे की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल से जुड़ी एक व्यवस्था के संबंध में दी गई जानकारी अलग-अलग स्तरों पर पहुंचते-पहुंचते बदल गई, जिसके कारण महिला कर्मचारियों को हटाने की स्थिति पैदा हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रतिनिधिमंडल के टावर के एक हिस्से में जाने के दौरान कर्मचारियों को कुछ समय के लिए हटने के लिए कहा गया था। बाद में यह व्यवस्था व्यापक रूप लेती गई और कुछ स्थानों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया।
टावर प्रमुख देंगे पद से इस्तीफा
विवाद के बाद एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी सोसाइटी द’एक्सप्लॉइटेशन डे ला टूर एफिल (SETE) के महानिदेशक पैट्रिक ब्रांको रुइवो ने इस साल के अंत में पद छोड़ने की घोषणा की है। वह वर्ष 2018 से इस पद पर हैं।
कंपनी की आंतरिक जांच में दौरे के प्रबंधन और संचालन से जुड़ी कई कमियां सामने आईं। कंपनी ने महिला कर्मचारियों को इस तरह ड्यूटी से हटाए जाने को अस्वीकार्य बताया है। भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए विशेष प्रोटोकॉल तैयार करने, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और लैंगिक समानता से जुड़े उपायों को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।
इस घटनाक्रम के बाद फ्रांस में धार्मिक मान्यताओं, कार्यस्थल की व्यवस्था और लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा तेज हुई थी। जांच रिपोर्ट के बाद अब विवाद में BAPS की भूमिका को लेकर स्थिति पहले की तुलना में स्पष्ट हुई है।








