डेस्क : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा शहर में आयोजित होने वाली जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। दो दिवसीय बैठक में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विदेश मंत्री साझा आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, बैठक का प्रमुख उद्देश्य वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक संकटों के आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए जी-20 देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करना है। चर्चा के दौरान आपूर्ति शृंखला में आने वाली बाधाओं, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर मंडराते खतरों और ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच समन्वय आवश्यक है।
ट्रंप के जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी
विदेश मंत्रियों की यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगामी जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, अटलांटा में होने वाली चर्चा से शिखर सम्मेलन के व्यापक आर्थिक एजेंडे को दिशा देने में मदद मिलेगी। इसमें वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का मंच है जी-20
जी-20 विकसित और विकासशील देशों का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग बढ़ाना है। इसके सदस्य देश दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 85 प्रतिशत योगदान देते हैं। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार में इनकी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक है और ये दुनिया की करीब दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जी-20 में 19 देश—अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इनके अतिरिक्त यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ भी इस मंच का हिस्सा हैं।
जी-20 का कोई स्थायी सचिवालय या स्थायी कर्मचारी तंत्र नहीं है। इसकी अध्यक्षता हर वर्ष सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है।









