नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेष अमेरिकी डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 तक इस सुविधा के तहत बैंकों ने कुल 72.85 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई है। इसमें सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर(बी) जमा का रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह में एफसीएनआर(बी) जमा के जरिए 65.397 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। यह कुल प्रवाह का करीब 90 फीसदी है। इसके अलावा ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (ओएफसीबी) के जरिए 4.86 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ईसीबी) के जरिए 2.591 अरब डॉलर जुटाए गए हैं।
तीन सप्ताह में तेजी से बढ़ा प्रवाह
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई तक इस सुविधा के तहत कुल 40.816 अरब डॉलर जुटाए गए थे, जिसमें एफसीएनआर(बी) जमा की हिस्सेदारी 36.725 अरब डॉलर थी। इसके बाद महज तीन सप्ताह में एफसीएनआर(बी) के जरिए जुटाई गई राशि में करीब 28.6 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत
विदेशी मुद्रा प्रवाह में बढ़ोतरी का असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखाई दिया है। 14 अगस्त तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डॉलर बढ़कर 716.90 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। यह करीब छह महीने का उच्च स्तर है।
क्यों लाई गई थी यह सुविधा
आरबीआई ने जून 2026 में ताजा एफसीएनआर(बी) जमा के लिए विशेष अमेरिकी डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की थी। इसका उद्देश्य बैंकों के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाना और देश की विदेशी मुद्रा उपलब्धता को मजबूत करना था। योजना के तहत पात्र एफसीएनआर(बी) जमा की अवधि तीन से पांच साल रखी गई है।
आरबीआई ने बाद में एफसीएनआर(बी) जमा के लिए इस विशेष सुविधा की समयसीमा घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दी। केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस फैसले के पीछे योजना को मिली मजबूत प्रतिक्रिया और पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाया जाना प्रमुख कारणों में शामिल है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इससे पहले संकेत दिया था कि केंद्रीय बैंक की विभिन्न पहलों के जरिए करीब 80 अरब डॉलर तक विदेशी मुद्रा आकर्षित की जा सकती है। 21 अगस्त तक 72.85 अरब डॉलर का प्रवाह इस लक्ष्य के काफी करीब पहुंच चुका है।








