डेस्क : अफगानिस्तान में इस साल की शुरुआत से प्राकृतिक आपदाओं ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, देश के सभी 34 प्रांतों में अब तक 92 हजार से अधिक लोग प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कम से कम 97 लोगों की मौत हुई, जबकि 331 लोग घायल हुए हैं।
OCHA की रविवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, प्राकृतिक आपदाओं के कारण करीब 10 हजार मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि 2,100 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो गए। इस वर्ष अब तक लगभग 13 हजार परिवार इन आपदाओं की चपेट में आए हैं।
बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान
अफगानिस्तान में मानवीय संकट बढ़ाने में बाढ़ और अचानक आने वाली बाढ़ प्रमुख कारण बनी हुई हैं। इनसे करीब 88 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। गरीबी, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की सीमित उपलब्धता से पहले ही जूझ रहे लोगों पर इसका अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
20 जुलाई से 3 अगस्त के बीच ही 10 प्रांतों में करीब 5 हजार लोग प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए। इनमें नूरिस्तान, काबुल, गजनी, कपिसा और परवान सहित कई इलाके शामिल हैं।
पूर्वी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
OCHA के अनुसार, पूर्वी अफगानिस्तान में प्राकृतिक आपदाओं से 51 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर नुकसान दर्ज किया गया है।
आपदाओं का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। कई इलाकों में कृषि भूमि, सड़कें और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। खेतों के नुकसान और घरों के तबाह होने से लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है और कृषि पर निर्भर परिवारों के सामने खाद्य एवं आय संबंधी संकट का खतरा बढ़ गया है।
मानवीय सहायता पर बढ़ी निर्भरता
OCHA ने चेतावनी दी है कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार से कमजोर परिवारों की मानवीय सहायता पर निर्भरता बढ़ रही है। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए घरों का पुनर्निर्माण, खेतों को दोबारा तैयार करना और क्षतिग्रस्त संपत्तियों को बदलना मुश्किल हो रहा है।
अफगानिस्तान पहले से ही गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है और लाखों लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं। बाढ़, सूखा, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाएं देश की आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों को और गहरा कर रही हैं, जिससे प्रभावित समुदायों के लिए सामान्य स्थिति में लौटना कठिन होता जा रहा है।
मानवीय एजेंसियों ने आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता, बेहतर पूर्व तैयारी और आपदा-रोधी क्षमता मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।








