डेस्क : अफगानिस्तान में बच्चों के बीच कुपोषण का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने चेतावनी दी है कि देश में करीब 10 लाख बच्चे गंभीर और जानलेवा कुपोषण से जूझ रहे हैं। समय पर इलाज और आवश्यक पोषण नहीं मिलने पर इन बच्चों की जान को गंभीर खतरा है।
यूनिसेफ के अनुसार, पूरे अफगानिस्तान में करीब 37 लाख बच्चे वेस्टिंग (अत्यधिक दुबलापन) से प्रभावित हैं। इनमें लगभग 10 लाख बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition) की स्थिति में हैं, जो कुपोषण का सबसे गंभीर रूप माना जाता है।
यूनिसेफ के अफगानिस्तान प्रतिनिधि ताजुद्दीन ओयवाले ने जिनेवा में पत्रकारों से कहा कि यदि तत्काल उपचार और सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई तो इन बच्चों में बड़ी संख्या में मौत का खतरा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक पांच लाख से अधिक बच्चों को मध्यम और गंभीर कुपोषण के कारण अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है।
छह महीने से कम उम्र के बच्चों पर भी संकट
ओयवाले ने बताया कि गंभीर कुपोषण और उससे जुड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं के साथ अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों में करीब 40 प्रतिशत छह महीने से कम उम्र के शिशु हैं। वहीं, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण के कुल मामलों में 80 प्रतिशत से अधिक हैं।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई 2025 में गंभीर तीव्र कुपोषण के करीब 6,000 मामले अस्पतालों में दर्ज हुए थे, जबकि जुलाई 2026 में यह संख्या बढ़कर 8,000 से अधिक हो गई। दक्षिणी अफगानिस्तान के कुछ अस्पतालों में अब प्रत्येक उपलब्ध बिस्तर के मुकाबले तीन से चार गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे पहुंच रहे हैं।
सूखा, बाढ़ और आर्थिक संकट ने बढ़ाई मुश्किल
अफगानिस्तान पहले से ही लंबे समय से जारी आर्थिक संकट, सूखे, अचानक आने वाली बाढ़, क्षेत्रीय अस्थिरता और सीमा पार व्यापार में रुकावटों से जूझ रहा है। परिवार पौष्टिक भोजन कम करने को मजबूर हैं और बच्चों के भोजन की मात्रा भी घट रही है।
यूनिसेफ के मुताबिक, कई बच्चों को मां के दूध के बाद पर्याप्त पौष्टिक आहार के बजाय केवल चाय के साथ रोटी या पतला किया हुआ दही मिल पा रहा है। इससे बच्चों में कुपोषण के साथ-साथ दस्त और श्वसन संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, जिससे वे और अधिक कमजोर हो जाते हैं।
विदेश से लौटे लाखों अफगानों का दबाव
2023 से अब तक करीब 60 लाख अफगान नागरिक विदेशों से वापस लौट चुके हैं, जिनमें आधे से अधिक बच्चे हैं। इससे पहले से सीमित स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
यूनिसेफ ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती के कारण बच्चों के लिए उपलब्ध पोषण सेवाएं प्रभावित हुई हैं। वर्ष 2025 से अब तक गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों के उपचार वाले 100 से अधिक केंद्र बंद हो चुके हैं।
यूनिसेफ के अफगानिस्तान पोषण कार्यक्रम के लिए इस वर्ष करीब 18 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक इसका केवल 22 प्रतिशत ही वित्तपोषित हो पाया है।
ओयवाले ने कहा कि बच्चों के अस्पताल में पहुंचकर बेहद कमजोर होने का इंतजार करने के बजाय कुपोषण की रोकथाम और शुरुआती स्तर पर उपचार के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।








