डेस्क : ईरान के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से व्यापक माध्यमिक प्रतिबंधों की धमकी के बीच चीन ने मंगलवार को कड़ा पलटवार किया। चीन ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है और अपने वैध अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन ‘‘अवैध एकतरफा प्रतिबंधों’’ का दृढ़ता से विरोध करता है। उन्होंने कहा कि चीन और ईरान के बीच सहयोग में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या व्यवधान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लिन ने अमेरिका और ईरान से संघर्ष विराम पर सहमति बनाने की अपील करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध किसी समस्या का समाधान नहीं कर सकते।
ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अमेरिकी रणनीति
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा घोषित ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत वाशिंगटन ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग-थलग करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने उन देशों और संस्थाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध जारी रखते हैं।
अमेरिका की प्रस्तावित माध्यमिक पाबंदियों के दायरे में ईरान की डिजिटल संपत्तियां, तकनीक, सोना, विमानन और शिपिंग क्षेत्र शामिल हैं। इसका उद्देश्य ईरान की अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच को सीमित करना और तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया है, लेकिन चीन, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्किये, इराक, यूरोपीय संघ, भारत, पाकिस्तान और रूस जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार अमेरिकी कार्रवाई के संभावित दायरे में बताए जा रहे हैं।
चीन है ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
ईरान के लिए चीन सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, ईरान के गैर-तेल विदेशी व्यापार में चीन की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है। वहीं, ईरान के तेल निर्यात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा चीन खरीदता है।
2025 में चीन ने ईरान के साथ करीब 9.96 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार दर्ज किया। हालांकि, अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के अनुसार, इस आंकड़े में चीन को किए गए करीब 31.2 अरब डॉलर के कथित अप्रमाणित ईरानी कच्चे तेल के निर्यात को शामिल नहीं किया गया था।
केप्लर के अनुमान के मुताबिक, चीन ने 2025 में प्रतिदिन औसतन 13.8 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां बड़ी मात्रा में ईरानी तेल खरीदती हैं और कई बार उसे मलेशियाई या इंडोनेशियाई कच्चे तेल के नाम से दोबारा बाजार में पेश किया जाता है। इन सौदों का भुगतान अक्सर डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर मध्यस्थों के जरिए किया जाता है।
अमेरिका ने अप्रैल में ईरानी तेल की अरबों डॉलर की खरीद के आरोप में चीन की एक स्वतंत्र रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे। साथ ही, अमेरिकी प्रशासन ने चीनी बैंकों को चेतावनी दी थी कि अगर वे ईरानी तेल के कारोबार को सुविधाजनक बनाते हैं तो उन्हें भी माध्यमिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
चीन के ताजा बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका की आर्थिक दबाव की रणनीति के बावजूद बीजिंग ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों को कमजोर करने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है।








