अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी को नई दिशा, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा पर जोर: जयशंकर

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डेस्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इस सहयोग में मानव संसाधन विकास, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और मानवीय सहायता को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली में आयोजित अफ्रीका दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने विभिन्न पहलों के माध्यम से अफ्रीकी देशों को 80 हजार से अधिक छात्रवृत्तियां और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए हैं।

जयशंकर ने कहा कि भारत की अफ्रीका नीति में मानव संसाधन विकास सबसे महत्वपूर्ण केंद्र में रहा है। आईटीईसी, आईसीसीआर, सीवी रमन फेलोशिप और ई-वीबीएबी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अफ्रीकी देशों के छात्रों और पेशेवरों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर दिए गए हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने अफ्रीका के साथ अपने संबंधों में अब ‘गुणात्मक बदलाव’ किया है। इसके तहत अफ्रीकी देशों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने जांजीबार में आईआईटी मद्रास के परिसर और युगांडा में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना का विशेष उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि उन्हें इन दोनों संस्थानों पर विशेष गर्व है।

संकट के समय अफ्रीका के साथ खड़ा रहा भारत

जयशंकर ने कहा कि कोरोना महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के दौरान भारत ने अफ्रीकी देशों की लगातार मदद की है। उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत-अफ्रीका साझेदारी की मजबूती और लचीलापन बार-बार सामने आया है। भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के तहत हमेशा अफ्रीका के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।

उन्होंने अफ्रीकी दर्शन ‘उबुंटू’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अफ्रीका की सोच में समानता है। उबुंटू का भाव है— ‘मैं हूं क्योंकि हम हैं।’

खाद्य सुरक्षा में सहयोग

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक दक्षिण में संघर्षों के बढ़ते प्रभाव के बीच खाद्य सुरक्षा भी भारत-अफ्रीका सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के समय में बुर्किना फासो, मोजाम्बिक, लेसोथो, नामीबिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, नाइजीरिया, बोत्सवाना और सिएरा लियोन को खाद्यान्न की आपूर्ति की है।

जयशंकर ने कहा कि भारत में मोटे अनाज, विशेषकर मिलेट्स के उत्पादन को फिर से बढ़ावा देने का अनुभव भी अफ्रीकी देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में भारत ने एकजुटता के प्रतीक के रूप में 25 से अधिक अफ्रीकी देशों को दवाएं, टीके, चिकित्सा उपकरण और आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है।

अफ्रीका दिवस का ऐतिहासिक महत्व

अफ्रीका दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह दिवस 1963 में ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी (ओएयू) की स्थापना की याद में मनाया जाता है। बाद में यही संगठन अफ्रीकी संघ यानी अफ्रीकन यूनियन के रूप में सामने आया।

उन्होंने कहा कि अफ्रीका दिवस पैन-अफ्रीकनवाद की भावना और अफ्रीकी लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं को संस्थागत रूप देने वाले ऐतिहासिक पड़ाव की याद दिलाता है। यह दिवस हर वर्ष अफ्रीका के देशों और लोगों की उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भविष्य की दिशा पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करता है।