अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा, 13 साल के शानदार सफर का हुआ अंत

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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व टेस्ट कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। 30 जुलाई को सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले की जानकारी देते हुए रहाणे ने कहा कि अब उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से आगे बढ़ने का सही समय आ गया है। उनके संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे दौर का अंत हो गया, जिसमें उन्होंने अपनी तकनीक, धैर्य और शांत स्वभाव से खास पहचान बनाई।

रहाणे ने करीब 13 वर्षों तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। वह विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट में भारत के भरोसेमंद मध्यक्रम के बल्लेबाजों में शामिल रहे। मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य के साथ बल्लेबाजी करना और टीम को संकट से बाहर निकालना उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती रही।

85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 खेले

रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 5,000 से अधिक रन बनाए और उनके नाम 12 शतक दर्ज हैं। वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने भारत के लिए कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में वह भारतीय टीम की योजनाओं से बाहर हो गए थे। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच था। इसके बाद राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी नहीं हो सकी।

ऑस्ट्रेलिया में कप्तानी पारी हमेशा रहेगी याद

रहाणे के करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा प्रमुख है। एडिलेड टेस्ट में भारतीय टीम के 36 रन पर सिमटने के बाद रहाणे ने मेलबर्न टेस्ट में कप्तानी संभाली और शानदार शतक लगाकर टीम को वापसी की राह दिखाई।

मेलबर्न में उनकी 112 रन की पारी को भारतीय क्रिकेट के यादगार प्रदर्शनों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में भारत ने वह टेस्ट मैच जीतकर चार मैचों की सीरीज में जोरदार वापसी की थी। आगे चलकर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी सीरीज में 2-1 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

शांत कप्तान के तौर पर बनाई पहचान

रहाणे की कप्तानी की सबसे बड़ी विशेषता उनका शांत स्वभाव रहा। वह मैदान पर आक्रामकता के बजाय संयम और रणनीति के लिए पहचाने जाते थे। 2020-21 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी कप्तानी को भारतीय क्रिकेट के सफल विदेशी अभियानों में महत्वपूर्ण माना जाता है।

उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी के अलावा कई मौकों पर टीम की उपकप्तानी भी की। विराट कोहली की अनुपस्थिति में वह टीम का नेतृत्व करते रहे और मुश्किल परिस्थितियों में खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखने के लिए जाने गए।

2018 में टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ दौर

रहाणे ने अपने टेस्ट करियर में कई विदेशी दौरों पर महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में उनकी बल्लेबाजी को भारतीय टीम के लिए उपयोगी माना गया।

विशेषकर तेज और उछाल वाली पिचों पर उनकी तकनीक और डिफेंस की खूब तारीफ हुई। हालांकि उनके करियर में खराब फॉर्म का दौर भी आया और इसी वजह से उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा।

टीम से बाहर होने के बाद भी नहीं छोड़ा क्रिकेट

राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बावजूद रहाणे ने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा। मुंबई क्रिकेट के साथ उनका लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार खुद को साबित करने की कोशिश की और आईपीएल में भी सक्रिय रहे।

आईपीएल में उन्होंने अलग-अलग फ्रेंचाइजी के लिए खेलते हुए अपनी बल्लेबाजी का अनुभव दिखाया। हाल के वर्षों में उन्होंने टी-20 क्रिकेट की जरूरतों के अनुसार अपने खेल में भी बदलाव किया।

सोशल मीडिया पर भावुक संदेश

संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने अपने क्रिकेट सफर के लिए भारतीय टीम, साथी खिलाड़ियों, कोचों, परिवार और प्रशंसकों का आभार जताया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत के लिए खेलने का सपना उनके जीवन के सबसे गौरवपूर्ण अनुभवों में रहा।

रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट में उस पीढ़ी के एक और अनुभवी खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय यात्रा समाप्त हो गई, जिसने टेस्ट क्रिकेट में भारत को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया।

धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी, शांत नेतृत्व और ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक कप्तानी के लिए अजिंक्य रहाणे का नाम भारतीय क्रिकेट के यादगार अध्यायों में लंबे समय तक दर्ज रहेगा।