चन्नी की दूरी से बढ़ी कांग्रेस की चिंता, पंजाब में नेतृत्व को लेकर सियासी हलचल तेज

0

डेस्क : पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेदों की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरनजीत सिंह चन्नी के कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम से दूरी बनाने और फरीदकोट में आयोजित अलग रैली में शामिल होने के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को लेकर राजनीतिक अटकलें बढ़ गई हैं।

राहुल गांधी के कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, लेकिन चन्नी की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। इसी दौरान चन्नी फरीदकोट में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी को पंजाब कांग्रेस की मौजूदा सियासी स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रदेश नेतृत्व से मतभेदों की चर्चा

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से संगठन और नेतृत्व को लेकर असहमति की खबरें सामने आती रही हैं। चन्नी समर्थक नेताओं ने कई बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार यह दावा करता रहा है कि प्रदेश इकाई पूरी तरह एकजुट है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चन्नी का अलग-अलग कार्यक्रमों में सक्रिय रहना और पार्टी के प्रमुख आयोजनों में उनकी सीमित भागीदारी आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत हो सकती है।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत रखने की बड़ी चुनौती है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे, चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर मंथन जारी है।

चन्नी दलित समुदाय के बड़े कांग्रेस चेहरों में गिने जाते हैं और पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह नजर रखी जा रही है। कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर रखना अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस ने खारिज किए मतभेद के दावे

वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग लगातार पार्टी में किसी भी तरह की बड़ी गुटबाजी से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग कार्यक्रमों को पार्टी की अंदरूनी कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए और सभी नेता कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।

इसके बावजूद चन्नी का राहुल गांधी के कार्यक्रम से दूर रहना और फरीदकोट रैली में उनकी मौजूदगी ने पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस हाईकमान इस स्थिति को किस तरह संतुलित करता है और 2027 चुनाव से पहले पार्टी किस रणनीति के साथ आगे बढ़ती है।