अल नीनो से भारत में बढ़ सकता है गर्मी का कहर, 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान

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डेस्क : प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो भारत के लिए आने वाले महीनों में कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। कमजोर मानसून के बाद अब सूखा, खाद्य महंगाई, पानी की कमी और अगले वर्ष भीषण गर्मी का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। एक अध्ययन के अनुसार, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में सामान्य स्थिति की तुलना में करीब 15,800 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतें हो सकती हैं। यह आंकड़ा संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

मानसून में कमी से बढ़ी चिंता

इस वर्ष देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहा है। कम बारिश का असर कई राज्यों में कृषि और जल संसाधनों पर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

कम बारिश का असर धान, कपास, गन्ना और मक्का जैसी फसलों पर पड़ सकता है। यदि जल उपलब्धता और मिट्टी में नमी की स्थिति प्रभावित होती है तो आने वाले रबी मौसम में भी किसानों के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

खाद्य महंगाई का दबाव

अल नीनो के कारण मौसम में बदलाव और कमजोर बारिश का असर कृषि उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। फसलों की पैदावार प्रभावित होने पर चावल, दाल, सब्जियों, चीनी और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मानसून की कमी के बाद सर्दियों में भी तापमान सामान्य से अधिक रहता है तो गेहूं, सरसों और चने जैसी रबी फसलों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इससे खाद्य आपूर्ति और कीमतों को लेकर नई चुनौती सामने आ सकती है।

गर्मी और पानी की कमी का खतरा

कम बारिश के बाद जलाशयों और भूजल पर दबाव बढ़ने की आशंका है। यदि अगले वर्ष गर्मी जल्दी शुरू होती है और तापमान सामान्य से अधिक रहता है तो देश के कई हिस्सों में पानी की उपलब्धता बड़ी चिंता बन सकती है।

एक अनुमान के मुताबिक, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतें हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, बच्चों, खुले में काम करने वाले श्रमिकों और अन्य संवेदनशील लोगों पर पड़ सकता है।

अल नीनो पर नजर

अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने की स्थिति है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के तापमान और वर्षा के पैटर्न पर पड़ता है। भारत में भी इसके कारण मानसून और तापमान में बदलाव की आशंका रहती है।

मौसम विशेषज्ञ लगातार समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर नजर रख रहे हैं। हालांकि, अल नीनो की तीव्रता और भारत पर उसके वास्तविक प्रभाव में बदलाव संभव है। ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और उसके आधार पर जारी होने वाले पूर्वानुमान महत्वपूर्ण होंगे।