अल्बानिया में सड़कों पर उतरे युवा, प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग तेज

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क :  यूरोपीय देश अल्बानिया में युवाओं का सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बढ़ती बेरोजगारी और कथित भ्रष्टाचार के विरोध में जेन-जी और छात्रों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी तिराना में लगातार पांचवें दिन प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया।

प्रधानमंत्री के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन कर रहे युवाओं की प्रमुख मांग प्रधानमंत्री एडी रामा का इस्तीफा है। उनका आरोप है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति, उच्च शिक्षा का बढ़ता खर्च और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के सीमित अवसरों ने युवाओं की नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में भ्रष्टाचार और महंगाई जैसी समस्याओं के कारण आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है। युवाओं ने सरकार से जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार करने की मांग की है।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

तिराना में प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा भड़क उठी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाया, जबकि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। घटनास्थल पर पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।

रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को भी चोटें आईं। पुलिस अधिकारियों ने बल प्रयोग को सीमित बताते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। वहीं, पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के मामलों की जांच भी शुरू की गई है।

विवादित पर्यटन परियोजना से भी बढ़ा आक्रोश

अल्बानिया में जारी विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में दक्षिणी तट पर प्रस्तावित एक बड़ी लग्जरी पर्यटन परियोजना भी है। इस परियोजना को लेकर पहले से विरोध हो रहा था। प्रदर्शनकारियों ने जमीन के सौदों में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं। यह परियोजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी निवेश कंपनी के साथ संबंधित बताई गई है। हालांकि, इस विवाद में कुशनर की ओर से सीधे तौर पर किसी गलत काम में शामिल होने का प्रमाण सामने नहीं आया है।

शुरुआत में यह आंदोलन पर्यावरण और जमीन से जुड़े मुद्दों तक सीमित था, लेकिन बाद में इसमें शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक असंतोष भी शामिल हो गया।

प्रधानमंत्री ने इस्तीफे से किया इनकार

प्रधानमंत्री एडी रामा ने प्रदर्शनकारियों की इस्तीफे की मांग खारिज कर दी है। उनका कहना है कि सरकार जनता की जायज चिंताओं को सुनने और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

रामा ने देश को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाने की दिशा में काम जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी सरकार में बदलाव की मांग पर अड़े हुए हैं। यूरोपीय संघ की ओर से भी सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई है।

सरकार के सामने बढ़ी राजनीतिक चुनौती

लगातार बढ़ते प्रदर्शनों ने अल्बानिया की सरकार के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। युवाओं की भागीदारी और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग ने आंदोलन को व्यापक रूप दे दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रदर्शनकारी बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाल पाते हैं या देश में राजनीतिक तनाव और बढ़ता है।