अमेरिका-ईरान तनाव में नया मोड़, ट्रंप ने रोका हमला; बातचीत पर जोर

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डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयासों को नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ मध्यस्थों के जरिए बातचीत सोमवार दोपहर से शुरू हो सकती है। ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के चैनल सक्रिय हैं और अमेरिका समझौते के लिए तैयार है।

ट्रंप ने कहा कि यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह लोगों को मारना नहीं चाहते और युद्ध के बजाय समझौते को प्राथमिकता देंगे। ट्रंप के मुताबिक, ईरान के अलावा क्षेत्र के तीन अन्य देशों ने भी बातचीत की दिशा में पहल की है।

सऊदी अरब, यूएई, कतर की भूमिका अहम

ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ईरान के साथ हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद उन्होंने शुक्रवार को प्रस्तावित एक बड़े सैन्य हमले को रोकने का फैसला किया। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर समझौते की संभावना बन सकती है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक समझौता किया जाएगा। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक ऐसे किसी अंतिम समझौते की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौते की कोशिश

क्षेत्रीय मध्यस्थ हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए पिछले महीने बने समझौते को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में जुटे हैं। इस प्रस्ताव के तहत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के खुला रखने की बात सामने आई है।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच इस समुद्री मार्ग के संचालन के लिए संयुक्त व्यवस्था को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि, पहले भी दोनों पक्षों के बीच समझौते की शर्तों की अलग-अलग व्याख्या के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी थी। ट्रंप का कहना था कि जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खुला रखा जाना चाहिए, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और नियंत्रण को बरकरार रखने पर जोर देता रहा है।

कतर और सऊदी अरब की सक्रिय कूटनीति

सप्ताहांत में पर्दे के पीछे चली कूटनीतिक गतिविधियों ने तत्काल सैन्य टकराव को टालने में अहम भूमिका निभाई। कतर के अधिकारियों ने ईरान, अमेरिका और ओमान के साथ लगातार बातचीत की। इसके बाद शनिवार को ट्रंप को बताया गया कि तेहरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।

इसी दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से फोन पर बातचीत कर सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की। इसके बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर प्रस्तावित हमलों को रोकने की घोषणा की। उन्होंने इसके पीछे समुद्री मार्ग और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर हुई प्रगति को वजह बताया।

हालांकि, ईरान की ओर से ट्रंप के दावों को खारिज किया गया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने उनके बयान को झूठ बताया। वहीं, तेहरान के वार्ता प्रतिनिधिमंडल से जुड़े एक सूत्र ने ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फर्स को बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है।

खाड़ी देशों में भी मतभेद

अमेरिका की ईरान नीति को लेकर उसके खाड़ी सहयोगियों के बीच भी मतभेद सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका को संयम बरतने की सलाह दी है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के खिलाफ अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई की पैरवी की है।

यूएई का तर्क है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) सीधे अमेरिकी सैन्य दबाव के बिना अपना रुख बदलने के लिए तैयार नहीं होगी। ऐसे में सोमवार से प्रस्तावित बातचीत पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं। यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो इससे अमेरिका-ईरान तनाव कम होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद बढ़ सकती है।