डेस्क : राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने कहा कि सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की, शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर शिकायतें होती रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को लेकर लोगों के बीच झूठा परसेप्शन बनाने का काम करता है।
गहलोत का यह बयान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ उनके कथित विवाद के बीच आया है। भाजपा की ओर से गहलोत सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन शिक्षा मंत्री डोटासरा पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में पैसे लेने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। गहलोत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने डोटासरा पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगाया था।
‘मैंने कभी नहीं कहा कि डोटासरा ने पैसे खाए’
गहलोत ने कहा कि उन्होंने एक शिक्षक सम्मेलन में सामान्य तौर पर शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग की समस्या का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, इस बयान को डोटासरा से जोड़कर देखा गया, जबकि उनका ऐसा कोई आशय नहीं था।
गहलोत ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि डोटासरा या उनके किसी स्टाफ ने पैसे खाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उनके बयान को आधार बनाकर कांग्रेस नेताओं के बीच विवाद पैदा करने और पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
‘भाजपा कांग्रेस को लड़ाना चाहती है’
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का काम आरोप लगाना और लोगों के बीच एक धारणा बनाने की कोशिश करना है। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस के नेताओं को आपस में लड़ाने और उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। गहलोत ने दावा किया कि उनके और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच कोई विवाद नहीं है।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर भी दिया संदेश
गहलोत ने राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जहां भी वे जाते हैं, वहां उनके समर्थन में मुख्यमंत्री बनने के नारे लगते हैं, लेकिन पार्टी को ऐसे नारों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला कांग्रेस हाईकमान करेगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी को मजबूत करने और एकजुट होकर काम करने की अपील की। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस को समाज और गरीबों के प्रति अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने के लिए नेताओं का एकजुट रहना जरूरी है।
डोटासरा के बयान के बाद तेज हुई थीं अटकलें
गहलोत का बयान ऐसे समय आया है जब 30 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में गोविंद सिंह डोटासरा के बयान के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हुई थीं। इससे पहले गहलोत के आवास पर कांग्रेस में शामिल होने पहुंचे पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के सामने गहलोत के समर्थन में मुख्यमंत्री पद के नारे लगाए गए थे। डोटासरा ने इस नारेबाजी पर आपत्ति जताई थी।
गहलोत ने हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को विवाद का रूप देने से इनकार करते हुए कहा कि उनका और डोटासरा का कोई विवाद नहीं है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के नाम पर नारेबाजी से बचने और संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया।








