असम में करोड़ों की धोखाधड़ी का पर्दाफाश: पाकिस्तान से लिंक का शक, 6 गिरफ्तार

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डेस्क। असम एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। स्पेशल टास्क फोर्स ने गुवाहाटी में एक बड़े संगठित वित्तीय धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का संबंध पाकिस्तान के खुफिया एजेंटों (PIO) से होने की आशंका है। गिरोह ने पिछले करीब दो सालों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक खातों के जरिए पीड़ितों से कई करोड़ रुपये ठगे। एसटीएफ ने सोमवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि यह नेटवर्क म्यूल बैंक अकाउंट यानी ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहा था, जिनका इस्तेमाल केवल धोखाधड़ी के पैसे घुमाने और निकालने के लिए किया जाता है।

ऐसे सामने आया मामला

दरअसल, यह मामला सोनितपुर जिले में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की एक शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत दर्ज होने के बाद मामला आगे की जांच के लिए एसटीएफ को सौंप दिया गया। तेजपुर स्थित गजराज मिलिट्री इंटेलिजेंस से खुफिया जानकारी मिलने के बाद एसटीएफ ने गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान गुवाहाटी की रहने वाली मरजीना बेगम (28) के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खाते पर संदेह की नजर गई। 22 जून से 5 अगस्त 2026 तक के सिर्फ 47 दिनों में उनके खाते में कई लाख रुपये जमा हुए। हर बार पैसे आने के तुरंत बाद उन्हें निकाल लिया जाता था। पुलिस ने इसे धोखाधड़ी वाले ‘म्यूल अकाउंट’ का साफ पैटर्न बताया।

तीन की गिरफ्तारी और…

बताया जा रहा है कि आगे की जांच में मरजीना के खाते से जुड़े संदिग्ध लेन-देन में गुवाहाटी के मोफिजुल हक (22) और हिमांशु दास (19) का नाम सामने आया। शुरुआती जांच में इनकी गतिविधियों का पाकिस्तान के खुफिया एजेंट से जुड़ाव होने का संकेत मिला। 28 अक्टूबर को एसटीएफ ने एक ऑपरेशन चलाकर मरजीना बेगम, मोफिजुल हक और हिमांशु दास को गिरफ्तार किया। इनके पास से मोबाइल फोन और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए। हिरासत में पूछताछ के दौरान मोफिजुल और हिमांशु ने गिरोह से जुड़े कई और लोगों के नाम बताए। इन सुरागों पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, तीनों गुवाहाटी के रहने वाले हैं। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और कई दस्तावेज जब्त किए। गुवाहाटी पुलिस ने छापेमारी और गिरफ्तारी में एसटीएफ की मदद की।

आगे की जांच जारी

एसटीएफ के मुताबिक, अब तक की जांच से साफ है कि यह वित्तीय धोखाधड़ी सिंडिकेट पिछले करीब दो साल से देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था। गिरोह कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ठगी कर रहा था। शुरुआती अनुमान के अनुसार पीड़ितों से कई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पुलिस का मानना है कि गिरोह का मास्टरमाइंड असम के बाहर से गतिविधियों को नियंत्रित और समन्वयित कर रहा है। एसटीएफ बाकी सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी, ठगी के पैसे के रास्ते का पता लगाने तथा अन्य म्यूल बैंक खातों की खोज में जुटी हुई है।

बता दें कि ये गिरफ्तारियां असम में जासूसी से जुड़े एक और मामले के कुछ हफ्तों बाद हुई हैं। 4 अक्टूबर को एसटीएफ ने बिहार के अभिषेक कुमार सिंह (31) और गुवाहाटी में भारतीय सेना के एक रिटायर्ड जवान को गिरफ्तार किया था। उन पर पाकिस्तान के खुफिया एजेंट को सेना की गतिविधियों की जानकारी देने का आरोप था। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि रिटायर्ड जवान सेना के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा था और दूसरे व्यक्ति के साथ मिलकर सेना की जानकारी शेयर कर रहा था। दोनों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हनी-ट्रैप में फंसाया गया था। 5 अक्टूबर को बिहार के रितेश कुमार सिंह (39) को भी गिरफ्तार किया गया था।