डेस्क : बंगाल की खाड़ी में रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की चीन की कोशिशों के बीच बांग्लादेश से एक अहम खबर सामने आई है। बांग्लादेश सरकार ने अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए चीन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय दूसरी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ भी समझौते किए हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव बंदरगाह प्राधिकरण ने डेनमार्क की दिग्गज कंपनी Maersk Group के साथ 30 साल का समझौता किया है। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीन की योजना को कैसे लगा झटका?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन की नजर बांग्लादेश के महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाहों के विकास में बड़ी भूमिका हासिल करने पर रही है। मोंगला बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए चीन के साथ वित्तीय समझौता होने के बाद उसकी भूमिका और बढ़ी है।
हालांकि, बांग्लादेश ने बंदरगाह विकास से जुड़ी सभी परियोजनाएं चीन को सौंपने के बजाय अन्य देशों की कंपनियों के साथ भी साझेदारी की है। चटगांव बंदरगाह के लिए Maersk Group के साथ 30 साल का समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
इससे संकेत मिलता है कि बांग्लादेश अपनी समुद्री व्यापार सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ काम करना चाहता है।
मोंगला पोर्ट पर चीन के साथ हुआ बड़ा समझौता
इस पूरे मामले को समझने के लिए मोंगला बंदरगाह से जुड़ी परियोजना पर भी नजर डालना जरूरी है। बांग्लादेश ने 10 अक्टूबर 2026 को चीन के एक्जिम बैंक के साथ मोंगला बंदरगाह के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 335.78 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस राशि का इस्तेमाल बंदरगाह पर आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाएगा। परियोजना में दो आधुनिक कंटेनर टर्मिनल, कंटेनर यार्ड और माल की आवाजाही से जुड़ी सुविधाओं का विकास शामिल है।
ऋण पर दो प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित की गई है। इसकी पुनर्भुगतान अवधि 20 वर्ष है, जिसमें पांच वर्ष की छूट अवधि भी शामिल है।
इससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश एक तरफ मोंगला बंदरगाह के लिए चीन का वित्तीय सहयोग ले रहा है, तो दूसरी तरफ अन्य बंदरगाह परियोजनाओं में दूसरे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भी अवसर दे रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
भारत के लिए बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाह आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। मोंगला बंदरगाह भारतीय सीमा के करीब स्थित है और बंगाल की खाड़ी में समुद्री संपर्क तथा व्यापार के लिहाज से अहम भूमिका निभाता है।
भारत पहले बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के पास आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की योजना से जुड़ा था। वर्ष 2015 में दोनों देशों के बीच इस संबंध में सहमति बनी थी। इसके लिए लगभग 110 एकड़ जमीन निर्धारित की गई थी।
हालांकि, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने वर्ष 2025 में भारतीय आर्थिक क्षेत्र की इस परियोजना को रद्द कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित समय में विकास कार्य शुरू नहीं होने के कारण यह फैसला लिया गया। बाद में इसी जमीन पर चीनी आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की योजना सामने आई।
ऐसे में बांग्लादेश द्वारा अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ भी बंदरगाह विकास समझौते करना भारत के लिए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और चीन की भूमिका को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
क्या चीन पर बांग्लादेश की निर्भरता कम होगी?
बांग्लादेश के सामने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, व्यापार क्षमता बढ़ाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना बड़ी प्राथमिकताएं हैं। इसके लिए वह चीन, जापान और यूरोपीय कंपनियों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग कर रहा है।
जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के रियायती ऋण से मातारबाड़ी बंदरगाह के विकास की योजना और चटगांव बंदरगाह से जुड़ी परियोजनाएं भी बांग्लादेश की इस रणनीति का हिस्सा हैं।
हालांकि, Maersk के साथ समझौते को चीन से पूरी तरह दूरी बनाने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। मोंगला बंदरगाह के लिए चीनी वित्तीय सहयोग जारी है। इसलिए फिलहाल इस घटनाक्रम को बांग्लादेश की ओर से अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
आगे क्या होगा?
बांग्लादेश के बंदरगाहों का आधुनिकीकरण आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और निवेश के अवसरों को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए यह जरूरी होगा कि वह बांग्लादेश के साथ व्यापारिक संपर्क मजबूत करे और बंगाल की खाड़ी में अपने आर्थिक तथा रणनीतिक हितों पर नजर बनाए रखे।
चीन की मोंगला बंदरगाह परियोजना और Maersk के साथ चटगांव बंदरगाह समझौता यह दिखाते हैं कि बांग्लादेश अपनी समुद्री अवसंरचना के विकास में कई अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को शामिल कर रहा है। इसका वास्तविक असर परियोजनाओं के क्रियान्वयन और भविष्य में दोनों देशों के साथ बांग्लादेश के संबंधों पर निर्भर करेगा।









