निर्वासन के करीब एक साल बाद वेनेजुएला लौटीं नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो

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डेस्क : वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो करीब एक साल निर्वासन में रहने के बाद अपने देश लौट आई हैं। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मचाडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी वापसी की पुष्टि करते हुए भावुक संदेश लिखा, “मैं यहां हूं। आपके साथ।”

मचाडो की स्वदेश वापसी ऐसे समय में हुई है, जब वेनेजुएला में जारी राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए मचाडो की प्रशंसा की और उनकी सुरक्षा की कामना की।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह मचाडो के बारे में इस घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी नहीं रखते, लेकिन उन्हें एक अच्छी महिला मानते हैं। उन्होंने कहा कि मचाडो ने उन्हें अपना नोबेल पुरस्कार दिया था, इसलिए वह उनके बारे में कुछ नकारात्मक नहीं कह सकते। ट्रंप ने यह भी कहा कि वेनेजुएला में अमेरिका के प्रयास सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों को दिया श्रेय

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मचाडो की सुरक्षित वापसी को अमेरिका के समर्थन से चल रही सुलह वार्ता का परिणाम बताया। उन्होंने एक्स पर कहा कि इन वार्ताओं के जरिए सैकड़ों राजनीतिक कैदियों की रिहाई हुई है और विपक्ष से जुड़े सैकड़ों लोग निर्वासन से लौटे हैं।

रुबियो ने वेनेजुएला के सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि देश की राजनीति से जुड़े सभी वर्गों की स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान किया जाएगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार, मौजूदा वार्ता वेनेजुएला के लिए पिछले तीन दशकों में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव और स्थायी लोकतंत्र हासिल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

मादुरो सरकार के साथ रहा है टकराव

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला की राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के नेतृत्व वाली सरकार ने मचाडो के देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा रखा था और उन्हें भगोड़ा मानती है। सरकार ने उन पर वेनेजुएला में विदेशी सैन्य हस्तक्षेप की वकालत करने का आरोप भी लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मचाडो ने इससे पहले भी स्वदेश लौटने के कई प्रयास किए थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इनमें 24 जून को आए विनाशकारी दोहरे भूकंप के बाद लौटने की कोशिश भी शामिल थी।

मचाडो की वापसी को वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया, विपक्ष की स्वतंत्रता और राजनीतिक स्थिरता को लेकर आगे की स्थिति कूटनीतिक वार्ताओं और सरकार के रुख पर निर्भर करेगी।