डेस्क : उत्तर प्रदेश के रायबरेली से सरकारी तंत्र को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी सहायता दिलाने के बदले एक लेखपाल ने गरीब परिवार से उसकी बेटी को अपने पास भेजने की मांग की। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस प्रकरण में इलाके के उपजिलाधिकारी की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि गरीब परिवार सरकारी मदद के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के चक्कर लगा रहा था। इसी दौरान लेखपाल ने कथित तौर पर मदद के बदले परिवार की बेटी को उसके पास भेजने की बात कही। परिवार ने इस मांग का विरोध किया, जिसके बाद मामला सामने आया।
लेखपाल पर गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने का फायदा उठाते हुए लेखपाल ने सरकारी सहायता के बदले अनुचित मांग रखी। इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी देखी जा रही है।
मामले ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए मजबूर गरीब परिवारों की स्थिति और उन्हें सहायता पहुंचाने वाली व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसडीएम की भूमिका भी सवालों के घेरे में
मामले में इलाके के उपजिलाधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों और सरकारी सहायता से जुड़े मामलों की निगरानी प्रभावी तरीके से नहीं हुई।
अब पूरे प्रकरण की जांच और आरोपों की सत्यता सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लेखपाल के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और प्रशासनिक स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय की जाती है।
यह मामला सरकारी सहायता के नाम पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के शोषण की गंभीर तस्वीर सामने लाता है।








